मिर्गी के मरीज स्वयं को हरसंभव मानसिक तनाव से दूर रखें
अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के उपलक्ष्य में गीता भवन में जागरूकता सेमीनार का आयोजन हुआ

इंदौर
मिर्गी के मरीजों को अपनी जीवनशैली सुधारने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। नियमित रूप से योग एवं प्राणायाम करने से भी मिर्गी के रोग से राहत मिल सकती है। मिर्गी की रोकथाम के लिए दवाइयों का नियमित और समय पर प्रयोग करना जरुरी है। कोशिश यही करें कि मिर्गी के मरीज मानसिक तनाव से हरसंभव स्वयं को दूर रखें क्योंकि मानसिक तनाव का मरीजों पर ज्यादा प्रभाव हो सकता है।
इंदौर एपिलेप्सी एसोसिएशन विशेषज्ञ समिति के तत्वावधान में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के उपलक्ष्य में गीता भवन में आयोजित जागरूकता सेमीनार में एसोसिएशन की सचिव डॉ. श्रीमती वी वी नाडकर्णी ने मरीजों को परामर्श के दौरान उक्त महत्वपूर्ण जानकारियां दी। अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष डॉ. वसंत डाकवाले ने की। इस अवसर पर गीता भवन के ट्रस्टी संजीव कोहली, गीता भवन हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र भंडारी, मितेश दुबे, मनोज त्रिपाठी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। सेमीनार का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। डॉ. भंडारी ने भी मरीजों को नियमित रूप से दवाइयां लेने की सलाह दी। नीलम रानाडे ने मिर्गी रोग से जुडी भ्रांतियों को दूर करने हेतु वीडियो फिल्म के माध्यम से मरीजों को बीमारी के लक्षणों, कारणों एवं निदान से सम्बन्धित तथ्यात्मक जानकारियां दी। डॉ. नाडकर्णी ने मिर्गी के मरीजों के उपचार में सर्जरी के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि अनेक शोध कार्यों से भी यह सिद्ध हुआ है कि योग एवं प्राणायाम से रोग के प्रबन्धन में बहुत मदद मिलती है। इस अवसर पर डॉ. नाडकर्णी एवं डॉ. कुरेचिया ने सेमीनार में आए मरीजों का परीक्षण कर उन्हें निशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया।
