
इंदौर ।
संगीत इश्वर का दिया हुआ एक अनमोल वरदान है जो केवल मनोरंजन नहीं बल्कि हमारी आत्मा को भी स्पंदित करता है। संस्था मेक म्यूजिक और सुर अंजलि के माध्यम से एक नए अभियान का श्रीगणेश किया जा रहा है जिसे हमने “स्वच्छ इंदौर स्वच्छ संगीत” नाम दिया है। हम यहाँ एक ऐसा मंच बनाना चाहते हैं जहाँ माता-पिता अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर गीत और संगीत के कार्यक्रमों का आनंद ले सकें, जहाँ संगीत में शालीनता, संस्कृति, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का पर्यावरण बने और एक स्वस्थ पारिवारिक वातावरण में हम संगीत को आत्मसात कर सकें। हमारा उद्देश्य संगीत की गरिमा को सुरक्षित रखना भी है।
यह भावनात्मक और मन को छू लेने वाला उद्बोधन है मेक म्यूजिक के निर्देशक और संस्थापक राजीव रॉय का, जो उन्होंने गुरुवार की शाम को संस्था सुर अंजलि की मेजबानी में साउथ तुकोगंज स्थित जाल सभागृह में आम संगीत प्रेमियों के लिए आयोजित “दिल है कि मानता नहीं” शीर्षक संगीत संध्या में उपस्थित शहर के रसिक और प्रबुद्ध श्रोताओं के बीच अपने स्वागत उद्बोधन में व्यक्त किए। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती मीरा निगम ने सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। अन्य अतिथियों में श्रीमती नीना सैनी, रवि गुप्ता, मंजीत खालसा, सतीश पांडे, मुंबई से आए प्रख्यात प्रोड्यूसर डायरेक्टर कार्तिकी तिवारी, दीपेश जैन, आलोक वायपेयी, स्वप्नेश सोनी, बाबला भाई और संगीत संध्या के संगीत संयोजक गुड्डू मिश्रा सहित बड़ी संख्या में मेहमान और सहयोगी इस सुहानी शाम के साक्षी बने। इस मौके पर 14 वरिष्ठ एवं युवा गायक-गायिकाओं ने 30 सदाबहार गीतों की मनभावन प्रस्तुतियां देकर उनका मन जीत लिया। अध्यक्षता स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने की।
संगीत संध्या का शुभारंभ अर्चना भास्कर ने ‘सलोना सा साजन है…’ की एकल प्रस्तुति के साथ किया। इसके बाद हरि पी श्रीवास्तव और कल्पना साकेत ने ‘आपकी आँखों में कुछ…’ की प्रस्तुति देकर समूचे सभागृह को सम्मोहित बनाए रखा। राजेंद्र कुलकर्णी और डॉ. कीर्ति चतुवेदी ने ‘इतना है तुमसे प्यार…’ और संगीता पुराणिक ने ‘रात अकेली है…’ से माहौल को और खुशनुमा बना दिया। इसके बाद संगीता पुराणिक ने राजेंद्र कुलकर्णी के साथ ‘वादा कर ले…’ और डीपी श्रीवास्तव के साथ ‘जानेमन…जानेमन…’ जैसे सदाबहार गीतों से महफ़िल को और हसीन बना दिया। सुश्री हंसा साहू ने पहले ‘रुक जा रात…’ से सोलो और फिर किशोर पांडव के साथ ‘इतना न मुझसे…’ और कल्पना के साथ ‘ये मेरा दिल…’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियाँ देकर इस महफ़िल को और परवान पर चढाए रखा। इसके बाद तो डीपी श्रीवास्तव ने ‘छलकाए जाम…’, डॉ. कीर्ति चतुर्वेदी के साथ ‘रात के हमसफर…’ और संगीता पुराणिक के साथ एक बार फिर ‘जानेमन….जानेमन…’ से सभागृह में बैठे दर्शकों को मंत्रमुग्ध बनाए रखा। राजकुमार झा, राजेंद्र कुलकर्णी, शिरीष गोडबोले, अर्चना भास्कर, डॉ. श्रीमती कीर्ति चतुर्वेदी, आलोक जैन, किशोर पांडव, सुनैना नाइक, हरि पी श्रीवास्तव और सुश्री कल्पना ने करीब 3 दर्जन एक से बढ़कर एक गीतों की इतनी दिलकश और मन को छू लेने वाली प्रस्तुतियां दी कि लगभग चार घंटे तक चली इस गीत संगीत की दावत को मंत्रमुग्ध बनाए रखा। कभी गायक ने वाहवाही लूटी और कभी गीत और संगीत से जुड़े कलाकारों ने भी श्रोताओं का मन जीता। लम्बे अरसे बाद हिंदी फिल्मों के सदाबहार गीतों की यह महफ़िल सबके मन में बस गई। बार-बार तालियाँ भी गूंजती रहीं और गीतों के साथ सभागृह ने भी सुर से सुर मिलाकर अपने आनंदित होने का प्रमाण भी दिया।
इस मौके पर संस्था मेक म्यूजिक के प्रमुख राजीव रॉय ने विशेष मेडले और उनके गिटार की प्रस्तुति भी दी जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। संगीत संयोजन गुड्डू मिश्रा और उनकी टीम ने संभाला तथा श्रीमती अलका सैनी ने संचालन के साथ रोचक जानकारियां भी दी। अंत में वसुंधरा पाठक ने आभार माना। संस्था के निर्देशक राजीव रॉय ने अतीत की मीठी यादों को भी ताजा किया और 35 वर्ष पूर्व के लाइट म्यूजिक, आर्केस्ट्रा एवं गायन की तत्कालीन परिस्थितियों का हवाला देकर आज के दौर में चल रहे संगीत पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उस दौर में हमने बिना शोर किए अपनी साधना और कर्म के बल पर परिवारवाद और सीमित अवसरों की व्यवस्था को अनुशासन और संस्कार से जोड़ने के लिए ही मेक म्यूज़ की स्थापना की। आज हालात बहुत कुछ बदल गए हैं जो चिंता का भी विषय हैं। कुछ कलाकार केवल आर्थिक लाभ के उद्देश्य से संगीत के स्तर से समझौता कर रहे हैं जिससे सच्चे और संस्कारी श्रोता दूर होते जा रहे हैं। अब हम एक अच्छा और शालीन मंच बनाना चाहते हैं जहां हम एक निशुल्क सदस्यता की व्यवस्था कर आम लोगों को संगीत यात्रा का हिस्सा बनाएँगे। इसकी शुरुआत भी हाथोहाथ की गई। श्रोताओं ने इसे एक यादगार और पारिवारिक संगीत सौगात बताया।
