ब्रज रत्न वंदनाश्री और उनकी टीम के 32 कलाकार आज शाम संपत
पैलेस में ब्रज और वृन्दावन को उतार लाएंगे सुसज्जित मंच पर
अग्रवाल समाज केन्द्रीय समिति की मेजबानी में होगा अनूठा फाग महोत्सव – सभी तैयारियां हुई पूरी

इंदौर अग्रवाल समाज केन्द्रीय समिति की मेजबानी में रविवार 8 मार्च को बायपास स्थित संपत पैलेस गार्डन पर शाम 6 बजे से भक्ति, संस्कार, संस्कृति और संगीत से ओतप्रोत फाग महोत्सव मनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शनिवार की शाम को केन्द्रीय समिति के पदाधिकारियों और विभिन्न व्यवस्था समितियों के प्रभारियों ने संपत पैलेस की व्यवस्थाओं का अवलोकन कर वृन्दावन से आने वाली अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रंगमंच कलाकार वन्दनाश्री एवं उनकी टीम के 32 महिला-पुरुष कलाकारों की अगवानी सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया। कार्यक्रम स्थल पर समाज बंधुओं की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं। कलाकारों के लिए भव्य मंच भी बनाया गया है।
समिति के प्रमुख संरक्षक विनोद अग्रवाल, अध्यक्ष प्रेमचंद गोयल एवं संयोजक जगदीश बाबाश्री तथा गणेश गोयल ने बताया कि ब्रज रत्न की उपाधि से अलंकृत वंदनाश्रीजी पहली बार अपने वृन्दावनी रास बैंड के कलाकारों के साथ इंदौर आ रही हैं, हालाँकि वे पहले भी कई बार इंदौर में अपनी मनोहारी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं लेकिन वृन्दावनी रास बैंड के साथ वे पहली बार यहाँ आ रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर समाज बंधुओं के लिए बैठक व्यवस्था, सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा, रोशनी, पुष्प वर्षा, पेय जल, वाहनों के पार्किंग सहित समुचित प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। वंदनाश्रीजी और उनकी टीम के सभी कलाकार अपने साजो सामान सहित रात्रि को इंदौर पहुँच गए हैं। शनिवार को संपत पैलेस पर आयोजित बैठक में अग्रवाल समाज केन्द्रीय समिति के पूर्व अध्यक्ष, किशोर गोयल, संजय बांकडा, संतोष गोयल, राम एरन, कुलभूषण मित्तल कुक्की, गोविन्द सिंघल, अरविन्द बागड़ी, राजेश बंसल, विष्णु बिंदल, पीडी अग्रवाल महू सहित केन्द्रीय समिति के प्रमुख पदाधिकारियों, उपाध्यक्ष टीकमचंद गर्ग एवं रमेश मित्तल मेडीकैप्स, महामंत्री पवन सिंघानिया मोयरा एवं कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल भी उपस्थति थे जिन्होंने रविवार को होने वाले अनूठे फाग उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया।
वन्दनाश्रीजी को देश-विदेश में अनेक मंचों से पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी टीम में महिला कलाकार भी हैं और भजन गायकों से लेकर लोक नर्तक, संगीतज्ञ और अन्य कलाकार भी हैं जो देश-विदेश में अनेक मंचों से अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। बांके बिहारी के अनुपम दर्शन सहित आरती के साथ शुभारंभ के पश्चात ब्रज भाषा में ‘कर गए दिल पर टोना, बांके बिहारी के नैना…..’, ‘रंग होरी मचाई दई रे मोहन रसिया….’, ‘मेरा खोय गयो बाजूबंद……’, ‘नगर में जोगी आयो……’, ‘शिव मेरे बोल अँखियाँ तो खोल….’ और ‘जरा डमरू बजाओ भोलेनाथ….’ जैसे भजनों के माध्यम से वंदनाश्री और उनकी टीम के सिद्धहस्त कलाकार जब मंच पर पहुँचते हैं तो लगता है कि समूचा ब्रज और वृन्दावन उतर आया है।
