श्रीनगर मेन स्थित गार्डन पर चल रही शिव पुराण कथा में कार्तिकेय एवं भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर खूब झूमे श्रद्धालु

इंदौर शिव ऐसे देव हैं, जो हमें मुक्ति, गति और भक्ति भी प्रदान करते हैं। शिव पुराण की कथा मन पर पड़े माया के आवरण को हटाती है। माया का मोहपाश मनुष्य को जीवनभर भटकाता रहता है। माया के मकड़जाल से मुक्ति के लिए भगवान शिव की आराधना सबसे श्रेष्ठ मानी गई है क्योंकि शिव पुराण भी स्वयं भगवान द्वारा रचे गए शब्दों की ही ऐसी जनकल्याणकरी कृति है, जो दुर्लभ मनुष्य जीवन को सही दिशा में ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है। शिव पुराण की कथा का श्रवण करना प्रयागराज के कुंभ मेले में स्नान करने जैसा ही पुण्यशाली है।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं प्रख्यात आचार्य पं. विष्णुदत्त शर्मा महर्षि के, जो उन्होंने गुरुवार को श्रीनगर मेन स्थित गार्डन पर खत्री महिला मंच एवं खत्री सभा इंदौर की मेजबानी में चल रही महाशिवपुराण कथा के चौथे दिवस उपस्थित भक्तों को कार्तिकेय के प्राकट्य और भगवान गणेश के जन्मोत्सव एवं अन्य प्रसंगों की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। कथा में प्रतिदिन मनोहारी भजन संकीर्तन भी भक्तों के लिए आकर्षण और श्रद्धा के केंद्र बने हुए हैं। कथा में दिनोंदिन भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर सभी भक्तों ने पीताम्बर वस्त्र धारण कर पूजा अर्चना की। पं. शर्मा ने कहा कि पीला या केशरिया रंग हमारी सनातन संस्कृति में शुभता, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि मूंगे के शिवलिंग की स्थापना से घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और स्फटिक के शिवलिंग की पूजा से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर शांति एवं सकारात्मकता का संचार होता है। प्रारंभ में खत्री सभा के अध्यक्ष प्रदीप बिरदी, हरीश कपूर, श्याम मेहता, विजय खन्ना, निर्मल मेहरा तथा महिला मंच की ओर से श्रीमती रीता टंडन, श्रीमती उर्वशी बिरदी, रीता बैजल, रंजना खन्ना, श्रीमती ममता सेठ एवं साधना कपूर ने वैदिक मंगलाचरण के बीच व्यास पीठ एवं शिव पुराण ग्रन्थ की पूजा-अर्चना की। महिला मंच की प्रमुख श्रीमती रीता टंडन एवं ममता सेठ ने बताया कि कथा में तुलसी-जालंधर कथा, शिवरात्रि व्रत कथा, जप का महत्व एवं भगवान शिवाशिव की आराधना से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की भी व्याख्या होगी। कथा रविवार 15 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।
विद्वान वक्ता ने भगवान शिव से जुड़े विभिन्न पौराणिक प्रसंगों की भावपूर्ण व्याख्या की और कहा कि शिव जैसे सरल और सहज देवता और कोई नहीं हो सकते जो केवल दो बूँद जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। एक लौटा जल और सारी समस्याओं का हल जैसी मान्यता भगवान शिव की सरलता का ही प्रमाण है। उनके पुत्र गणेश भी अद्भुत और अनूठे पुत्र हैं जिन्होंने संसार में सबसे पहले अपने माता-पिता की परिक्रमा को ही तीर्थ यात्रा के रूप में प्रतिष्ठापित किया।
