*भागवत कथा में दिया धर्म और विनम्रता का संदेश*
*सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त*

इंदौर। रामनगर स्थित श्री रामेश्वर सोमेश्वर महादेव मंदिर समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या कथा पंडाल में उमड़ी। कथा व्यास महामंडलेश्वर 1008 स्वामी श्री शांति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज ने अपने मुखारविंद से भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार और वामन अवतार के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति और भावनाओं से सराबोर हो उठे। वहीं भागवत कथा में दिया धर्म और विनम्रता का संदेश दिया गया।
आयोजन के संयोजक गोपाल सिंह चौहान, यजमान मलखान सिंह कुशवाह, सहसंयोजक विजय दुबे व आकाश पटेल, अध्यक्ष अजय कुशवाह तथा उपाध्यक्ष दिलीप मौर्य ने कथा श्रवण के लिए पहुंचे सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ आध्यात्मिक वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।
स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज ने बताया कि जब-जब संसार में अधर्म और अहंकार बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने नृसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए हिरण्यकशिपु का अंत कर अहंकार का नाश किया।
इसके साथ ही वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने कहा कि राजा बलि के दंभ को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु वामन रूप में प्रकट हुए। उन्होंने तीन पग भूमि का दान मांगा। पहले पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्ग नाप लिया और तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उसे रसातल भेज दिया। इस प्रकार भगवान ने उसके अहंकार को समाप्त कर उसे सच्चे धर्म का बोध कराया।
