
इंदौर
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने जल की महत्ता का रेखांकित करते हुए कहा कि जल ही जीवन है और यह अनमोल है। जल के संरक्षण के बिना हमारे अस्तिव की कल्पना संभव नहीं है। जल है तो कल है। जल ससांर की पहली और सर्वोत्तम औषधि है। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि पृथ्वी पर लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढँका हुआ है, लेकिन इसमें से मात्र 2.5 प्रतिशत ही मीठा पानी है, उसमें भी बहुत कम हिस्सा ही पीने योग्य है। नदियां, तालाब, कुंए और बावडिया हमारी संस्कृति, सामाजिक विकास और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा हैं, इनकी उपेक्षा से हमारी सभ्यता का भी नुकसान हो रहा है। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सिंचाई के लिए अधिक पानी की जरूरत है। कृषि के लिए इस्तेमाल किया गया भू-जल का प्रतिशत आज अधिक बढ़ गया है। मंत्री श्री सिलावट ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल संवर्धन और जल संरक्षण के लिए सतत प्रयास करें और इसके लिए अपने क्षेत्रों में सतत् जनजागरूकता अभियान चलाये। मंत्री श्री सिलावट ने जल संरक्षण के उपाय बताते हुए कहा कि नागरिक अपने घरों एवं कार्यालयों में नलों को खुला न छोड़ें, वर्षा जल का संचयन करें, पेड़-पौधे लगाएं और जल को प्रदूषित होने से बचाएं।
