
विजय मेहता सत्संग समिति का दो दिवसीय आयोजन; शिव-राम नाम जाप, आकर्षक श्रृंगार और मातृशक्ति के भजन; हजारों ने ग्रहण की प्रसादी
इंदौर। वैशाख मास के पावन अवसर पर शीतलेश्वर महादेव मंदिर में विजय मेहता सत्संग समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय अखंड रामायण पाठ महादेव के रुद्राभिषेक और पूर्ण यज्ञ आहुति के साथ सम्पन्न हुआ। धार्मिक आयोजन में विधायक सुश्री उषा ठाकुर भी शामिल हुई। समिति के विजय मेहता गुरु जी ने बताया कि अखंड रामायण पाठ के साथ ही भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया गया। दो दिवसीय इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने शिव और राम नाम का जाप किया। कार्यक्रम में मातृशक्तियों द्वारा सुमधुर भजन प्रस्तुत किए गए। समापन पर महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। आयोजन में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी शामिल हुए।
‘राम नाम और शिव अभिषेक से कटते हैं जन्मों के पाप’: विजय मेहता गुरु जी
शीतलेश्वर महादेव में अखंड रामायण-रुद्राभिषेक के समापन पर कहा- वैशाख में शिव-राम की आराधना से मिलता है अक्षय पुण्य
शीतलेश्वर महादेव मंदिर में अखंड रामायण पाठ और शिव रुद्राभिषेक के समापन अवसर पर विजय मेहता गुरु जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, “वैशाख मास पुण्य का महीना है। इस माह में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का अखंड पाठ करने से मनुष्य के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं।
राम नाम कलियुग का सबसे बड़ा साधन है। रामायण केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है। राम के चरित्र से हमें मर्यादा, त्याग, सेवा और भ्रातृ प्रेम सीखना चाहिए। वहीं भगवान शिव वैराग्य, करुणा और कल्याण के देवता हैं। शिव का अभिषेक करने से घर में शीतलता, शांति और समृद्धि आती है।
जहां राम नाम का जाप और शिव का अभिषेक होता है, वहां दरिद्रता, कलह और रोग नहीं ठहरते। दो दिन तक चले इस आयोजन में आप सभी ने राम-शिव के नाम की जो गंगा बहाई है, उससे निश्चित ही आपका जीवन मंगलमय होगा।
मातृशक्ति ने भजनों से जो वातावरण भक्तिमय बनाया, वह साक्षात माता पार्वती और माता सीता का आशीर्वाद है। प्रसादी ग्रहण करना स्वयं नारायण का प्रसाद ग्रहण करना है।
याद रखें, शिव और राम अलग नहीं हैं। ‘शिव द्रोही मम दास कहावा, सो नर सपनेहु मोहि न पावा’ और ‘शिव सेवा कर फल राम भक्ति’। दोनों की आराधना से ही जीवन सार्थक होता है। वैशाख में किया गया यह पुण्य अक्षय रहेगा।”
