EWS के जनक: अनुराग प्रताप सिंह राघव
‘हक लेकर रहेंगे’ – एक व्यक्ति नहीं, एक आंदोलन का नाम


साल 2019। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। लेकिन कागज पर मिला अधिकार, जमीनी हकीकत में उलझ कर रह गया। प्रमाण पत्र की जटिल प्रक्रिया, आय-सम्पत्ति के अस्पष्ट नियम, और सबसे बड़ी बात – जानकारी का अभाव।ठीक उसी समय इंदौर की मिट्टी से एक आवाज उठी। यह आवाज किसी पद, किसी पार्टी या किसी सत्ता की नहीं थी। यह आवाज थी उस युवा की, जिसने तय किया कि “जो हक संविधान ने दिया है, वो लेकर रहेंगे”।उस युवा का नाम है अनुराग प्रताप सिंह राघव। आज पूरे प्रदेश में उन्हें “EWS के जनक” के नाम से जाना जाता है। इंदौर से शुरू हुई उनकी एक छोटी सी पहल आज “EWS क्रांति जन-जागरण यात्रा” बनकर मध्यप्रदेश के हर जिले, हर गांव तक पहुंच चुकी है।22 जुलाई को अनुराग प्रताप सिंह राघव का जन्मदिन केवल एक तारीख नहीं है। यह उस संकल्प का स्मरण है जिसने एक समाज को उसकी पहचान, उसके सम्मान और उसके अधिकारों से फिर से जोड़ा
: कालवी विचारधारा सेवा, स्वाभिमान और संघर्ष*
अनुराग प्रताप सिंह राघव किसी राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि “कालवी विचारधारा” से निकले हैं। कालवी विचारधारा का मूल मंत्र है – “समाज पहले, स्वार्थ बाद में”।
उनके लिए राजपूत समाज का मतलब सिर्फ इतिहास या गौरवगाथा नहीं है। उनके लिए इसका मतलब है – कर्तव्य। कर्तव्य उस छात्र का, जो फीस के अभाव में पढ़ाई छोड़ रहा है। कर्तव्य उस युवा का, जो योग्यता होने के बाद भी नौकरी से वंचित है। कर्तव्य उस व्यापारी का, जो पूंजी के अभाव में अपना कारोबार नहीं बढ़ा पा रहा।
इसी सोच के साथ उन्होंने EWS को केवल “आरक्षण” नहीं, बल्कि “सामाजिक न्याय का औजार” बना दिया। उनका स्पष्ट मानना है:
“शिक्षा, नौकरी, व्यापार और सम्मान – यही हमारी चार प्राथमिकताएं हैं। बाकी सब बाद में।”
EWS क्रांति की शुरुआत – इंदौर से मालवा तक
मध्यप्रदेश में EWS आंदोलन की नींव इंदौर में पड़ी। अनुराग ने सबसे पहले समझा कि समस्या कानून में नहीं, क्रियान्वयन में है।फिर शुरू हुआ पैदल मार्च, जनसभाएं, शिविर और दस्तावेज़ कैंप। धीरे-धीरे यह आंदोलन इंदौर से निकलकर शाजापुर, धार, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी तक फैल गया।हाल ही में धार में आयोजित “EWS क्रांति सरलीकरण जन-जागरण यात्रा” इसका सबसे बड़ा उदाहरण थी। लालबाग से घोड़ा चौपाटी तक हजारों लोगों का जनसैलाब। हाथों में तिरंगा, मुंह पर एक ही नारा: “आरक्षण हमारा हक, सरलीकरण तक संघर्ष जारी रहेगा”।
इस यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे अनुराग प्रताप सिंह राघव। मंच से उन्होंने साफ कहा:”EWS स्वर्ण और क्षत्रिय समाज का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जटिल फार्म, पटवारी-तहसील के चक्कर और अस्पष्ट नियमों के कारण गरीब का बेटा आज भी प्रमाण पत्र नहीं बनवा पा रहा। हम सड़क से संसद तक लड़ेंगे, लेकिन यह हक लेकर रहेंगे। साथ ही पंचायती राज चुनाव में भी EWS आरक्षण लागू होना चाहिए, ताकि गांव का अंतिम व्यक्ति भी नेतृत्व कर सके।”
मांगें क्या हैं? समस्या की जड़ में वार
अनुराग और उनकी टीम की 2 मुख्य मांगें हैं, जो आज पूरे प्रदेश की मांग बन चुकी हैं:
1. EWS प्रमाण पत्र प्रक्रिया का सरलीकरण:
आज भी एक गरीब परिवार को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 7-8 विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आय, कृषि भूमि, मकान के नियम इतने उलझे हैं कि पात्र व्यक्ति भी अपात्र हो जाता है। अनुराग की मांग है – “एक फार्म, एक खिड़की, 7 दिन में प्रमाण पत्र”।
2. पंचायती राज में EWS आरक्षण:
10% आरक्षण शिक्षा और नौकरी में तो मिला, लेकिन गांव की सरकार में नहीं। अनुराग का तर्क है कि जब तक पंचायत, जनपद और जिला पंचायत में EWS को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचेगा।
समाजसेवी अनुराग – जन्मदिन पर भी सेवा का संकल्प
अनुराग प्रताप सिंह राघव का व्यक्तित्व उन्हें भीड़ से अलग करता है। वह नेता कम, समाजसेवी ज्यादा हैं।
अपने जन्मदिन पर उन्होंने केक काटने और बधाई लेने के बजाय समाज से 3 चीजों में मदद का आह्वाहन किया:
1. शैक्षणिक मदद: गरीब छात्रों की फीस, किताबें और कोचिंग में सहयोग
2. चिकित्सा सहायता: असहाय परिवारों के इलाज में मदद
3. व्यापार को बढ़ावा: युवा उद्यमियों को स्टार्टअप और रोजगार में सहयोग
उनका मानना है कि “जन्मदिन मनाने का सबसे अच्छा तरीका है – किसी के जीवन में उजाला करना”।
पिछले 5 वर्षों में उनकी टीम ने सैकड़ों छात्रों को छात्रवृत्ति दिलवाई, दर्जनों युवाओं को रोजगार और व्यापार में मदद की, और हजारों परिवारों को EWS प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं से जोड़ा।
नेतृत्व की विशेषता – आक्रामकता के साथ संवेदनशीलता*
अनुराग की सबसे बड़ी ताकत है उनका तरीका। वह सड़क पर उतरकर आक्रामक आंदोलन भी करते हैं, और कार्यालय में जाकर शांतिपूर्ण संवाद भी। वह सरकार के विरोधी नहीं, व्यवस्था के दोष के आलोचक हैं।
इसी कारण आज हर राजनीतिक दल, हर प्रशासनिक अधिकारी उनकी बात सुनता है। क्योंकि उनके पीछे भीड़ नहीं, “मुद्दे की सच्चाई” खड़ी
– प्रदेश से देश तक*
अनुराग अब रुकने वाले नहीं हैं। “EWS क्रांति जन-जागरण यात्रा” अब पूरे प्रदेश के 52 जिलों में जाएगी। उनका लक्ष्य है 2026 तक:
– मध्यप्रदेश में EWS प्रमाण पत्र प्रक्रिया को देश में सबसे सरल बनवाना
– पंचायती राज में 10% EWS आरक्षण लागू करवाना
– हर जिले में “EWS सहायता केंद्र” खोलना
एक नाम, एक आंदोलन
इतिहास गवाह है कि बड़े बदलाव अक्सर एक व्यक्ति के संकल्प से शुरू होते हैं।
आज 21वीं सदी में अनुराग प्रताप सिंह राघव ने “आर्थिक न्याय” की अलख जगाई है। वह EWS के जनक ही नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी के प्रतीक हैं जो कहती है – “हमें भीख नहीं, हक चाहिए”।
उनके जन्मदिन पर पूरे मालवा-निमाड़ ही नहीं, पूरे प्रदेश का स्वर्ण और क्षत्रिय समाज उन्हें नमन करता है।
क्योंकि जब तक अनुराग जैसे लोग हैं, तब तक यह विश्वास है कि हक मांगने से नहीं, छीनकर लिया जाता है।
*”हक लेकर रहेंगे” – यही अनुराग प्रताप सिंह राघव हैं।
