
लम्बे अरसे बाद हो रहे अनुष्ठान की रुपरेखा तैयार, अब तक 350 साधकों के पंजीयन
इंदौर, 2 जून। पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में गुरुवार 4 जून को अपराह्न 4 बजे से एयरपोर्ट रोड स्थित नरसिंह वाटिका पर आयोजित हो रहे सिद्ध श्रीचक्र साधना महोत्सव में शामिल होने वाले साधकों के लिए हिमालय स्थित विभिन्न देवालयों से अभिमंत्रित रुद्राक्ष, श्रीयंत्र एवं अन्य पूजन सामग्री को मंगलवार को ब्रह्मचारी आचार्य प्रशांत ने श्री श्रीविद्याधाम के वेदपाठी बटुकों के साथ माँ ललिताम्बा महा त्रिपुर सुंदरी भगवती को समर्पित किया। नरसिंह वाटिका स्थित अनुष्ठान स्थल का भी गोबर एवं पंचगव्य से लीपकर शुद्धिकरण किया जा रहा है। अनुष्ठान के निमन्त्रण इंदौर-उज्जैन के महाकालेश्वर, खजराना गणेश, रणजीत हनुमान, अन्नपूर्णा एवं अन्य सभी प्रमुख देवालयों में समर्पित किए जा चुके हैं।
अनुष्ठान के सूत्रधार गुप्तकाशी-केदारखंड के आचार्य प्रशांत ब्रह्मचारी के निर्देशन में लंबे अरसे बाद शहर में हो रहे इस अनुष्ठान के प्रति साधकों में जबर्दस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 500 साधकों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 350 से अधिक साधको के पंजीयन हो चुके हैं। पंजीयन पहले आएं पहले पाएं आधार पर ही संभव होंगे। गंगा के उदगम स्थल गोमुख से अभिमंत्रित और बद्रीनाथ धाम से सिद्ध किए गए गोमती चक्र, केदारनाथ के चरणों से स्पर्श कराए गए पवित्र रुद्राक्ष सहित पवित्र गंगा जल से साधकों के शुद्धिकरण के साथ गुरुवार 4 जून को अपराह्न 4 बजे इस दिव्य अनुष्ठान का शुभारंभ होगा। इसके पूर्व दोपहर 3 बजे से भजन संगीत का क्रम चलेगा। यह समूचा अनुष्ठान महामंडलेश्वर स्वामी गिरिजानंद जी सरस्वती ‘भगवन’ द्वारा बताई गई शास्त्रोक्त क्रियाओं के अनुरूप ही होगा।
श्रीचक्र की स्थापना एवं पूजन – साधकों के शुद्धिकरण के बाद सिद्ध श्रीचक्र की विधि पूर्वक स्थापना होगी और गुरु पूजा, गणपति पूजा, कलश स्थापना के पश्चात श्रीसूक्त, देवीसूक्त, ललितासहस्त्रनाम मन्त्रों से सामूहिक जाप होगा। इस अनुष्ठान में माँ जगदम्बा का विशेष अर्चन होगा जिसमें अश्वगंधा, ब्राह्मी, हल्दी, कुमकुम, चन्दन, तुलसी, कमलगट्टा, शतावरी, इत्र, केसर, ब्रह्मकमल जैसी अनेक पवित्र सामग्री का प्रयोग होगा।
साधकों को मिलने वाली सामग्री – इस अनुष्ठान में शामिल साधकों को जो श्रीयंत्र घर के लिए दिए जाएँगे वे हिमालय के पवित्र क्षेत्रों से सिद्ध कर लाए गए हैं जहाँ ऋषि मुनियों ने कड़ी तपस्याएँ की है और माँ ललिताम्बा का दिव्य प्रभाव माना जाता है। साधकों को बद्रीनाथ से सिद्ध किए गए गोमती चक्र और केदारनाथ के चरणों से स्पर्श कराए गए पवित्र रुद्राक्ष भी भेंट किए जाएँगे। सामूहिक महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ इस दिव्य अनुष्ठान का समापन होगा। देश के अनेक प्रमुख संत विद्वान, महामंडलेश्वर और अखाड़ों के पदाधिकारियों सहित मालवांचल के अनेक संत महंत भी आमंत्रित किए गए हैं। अनुष्ठान की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
