
मठ पर चल रहे 108 भागवत पारायण में आज शाम होगी फूलों की संगीतमय होली
अधिकमास में विद्वान ब्राह्मणों के साथ भागवतजी की पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी
इंदौर एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मंगलवार को रजत मंडित पंचमुखी हनुमानजी को 11 किस्म के पांच क्विंटल फलों से निर्मित वाटिका में विराजित किया गया। तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इस मनोहारी वाटिका के दर्शन कर मठ पर महामंडलेश्वर श्रीमहंत स्वामी रामचरणदास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में चल रहे 108 श्रीमद भागवत पारायण में शामिल ब्राह्मणों का पूजन कर विभिन्न अनुष्ठानों में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। बुधवार 3 जून को शाम 8 बजे से मठ पर फूलों की संगीतमय होली का आयोजन होगा।
मठ के पुजारी महंत अमितदास ने बताया कि मठ पर पुरुषोत्तम मास में चल रहे अनुष्ठानों के तहत मंगलवार को भगवान पुरुषोत्तम, रणछोड़जी, टीकमजी एवं हंसेश्वर महादेव सहित अन्य देवालयों का भी मनोहारी पुष्प श्रृंगार किया गया। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आकर भागवत पारायण में शामिल विद्वान ब्राह्मणों एवं भागवतजी का पूजन कर पुण्य लाभ उठा रहे हैं। हनुमानजी की फल वाटिका के दर्शन करने के लिए सुबह से देर रात तक तीन हजार से अधिक भक्तों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। फल वाटिका में पांच किस्म के आम, अनार, अंगूर, पपीता, चीकू, तरबूज एवं संतरा का प्रयोग किया गया। मठ पर प्रतिदिन पूजन-अर्चन के लिए भक्तों के समूह उमड़ रहे हैं। यहाँ विद्वानों द्वारा “ओम नमः भगवतै वासुदेवाय” तथा अन्य महामन्त्रों के जाप्यानुष्ठान का सिलसिला भी पहले दिन से ही जारी है। मठ परिसर स्थित गौशाला में भी प्रतिदिन सुबह गौसेवा करने वाले भक्तों का ताँता लगा हुआ है। मंगलवार को भी गोवंश के लिए गोशाला में विशेष अन्नकूट का आयोजन कर गुड, दलिया, हरी सब्जी और अन्य व्यंजनों का भोग समर्पित किया गया।
पुजारी महंत अमितदास ने बताया कि मठ पर आचार्य पं. राजेश शास्त्री के निर्देशन में विभिन्न शास्त्रोक्त अनुष्ठान चल रहे हैं। मठ की परम्परा के अनुसार अधिकमास के उपलक्ष्य में पूरे माह प्रतिदिन सुबह 9 से 12 एवं शाम 4 से 7 बजे तक 108 विद्वानों द्वारा यह दिव्य अनुष्ठान किया जा रहा है जो 15 जून तक चलेगा। मठ पर प्रतिदिन आरती एवं ब्राह्मण तथा संतों के लिए प्रसादी की व्यवस्था भी जारी है। आगामी दिनों में मठ पर भगवान के नौका विहार, संगीतमय सुंदरकाण्ड पाठ और विभिन्न विशेष उत्सव भी आयोजित होंगे। सभी अनुष्ठान मठ स्थित देवी-देवताओं एवं आश्रम स्थित गौशाला में पल रही गौमाता की साक्षी में हो रहे हैं।
