
छत्रीबाग स्थित रामद्वारा पर चातुर्मास महोत्सव का शुभारंभ-23 अक्टूबर तक प्रतिदिन होंगे प्रवचन
इन्दौर चातुर्मास हमारे लिए जागृति और चेतना का महापर्व है। वर्ष के बारह में से चातुर्मास के चार माह घटा दिए जाएं तो कुछ भी शेष नहीं रहेगा क्योंकि इन चार माह में ही हम अपने जीवन में सत्संग, भक्ति, आराधना, पूजा और धर्म संस्कृति से जुड़े अनुष्ठानों में शामिल होकर अपने जीवन को कृतार्थ बना सकते हैं। यदि यह समय चूक गए तो पूरा वर्ष बल्कि जीवन भी व्यर्थ माना जाएगा। हमारे संतों और महापुरुषों ने चातुर्मास की परम्परा इसीलिए स्थापित की है ताकि हम इस दौरान अपने स्वयं का भी आकलन और मूल्यांकन कर अपनी कमियों को दूर कर सकें।
ये विचार हैं अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत हर्षराम महाराज के, जो उन्होंने छत्रीबाग रामद्वारा पर 90 वर्ष पुरानी परम्परा का पालन करते हुए चातुर्मास के शुभारंभ प्रसंग पर धर्म सभा में व्यक्त किए। रामद्वारा ट्रस्ट के देवेन्द्र मुछाल, लक्ष्मी कुमार मुछाल एवं रामसहाय विजयवर्गीय ने बताया कि संत हर्षराम 23 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा करेंगे। वे रतलाम जिले के ताल रामद्वारा से पधारे हैं। प्रारम्भ में छत्रीबाग रामद्वारा ट्रस्ट की ओर से रामनिवास मोड़, गिरधर नीमा, हेमंत काकाणी, वासुदेव सोलंकी, भूरा पहलवान, प्रो दिलीप जोशी, घनश्याम पोरवाल आदि ने संतश्री की अगवानी कर उनका स्वागत किया। दीप प्रज्वलन एवं आद्याचार्य स्वामी रामचरण महाराज के चित्र पर माल्यार्पण के साथ चातुर्मास का शुभारंभ हुआ।
संत हर्षराम ने कहा कि मनुष्य जीवन हमें बहुत दुर्लभता से मिला है और उससे भी दुर्लभ है इस जीवन में सत्संग मिलना। चातुर्मास के चार माह हमें भक्ति भावना और सत्संग के बीच रहने के लिए मिले हैं। इस समय का हम जितना अधिक सदुपयोग करेंगे मनुष्य जीवन उतना अधिक सार्थक होगा। इन चार माह में हमें अपने स्वयं के बारे में आकलन और मूल्यांकन करना चाहिए। रामद्वारा जैसे पवित्र स्थल पर हम नियमित रूप से आकर संतों की वाणी का पुण्य लाभ उठाएं और किसी भी रूप में धर्म एवं संस्कृति से जुड़े रहें, यही हमारे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य होगा।
