
तिलक नगर क्षेत्र के कृषि विहार उद्यान में चल रहे शिवपुराण ज्ञान यज्ञ में पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री के आशीर्वचन
इंदौर प्रशंसा से अभिमान और अभिमान से पतन निश्चित होता है लेकिन मन और बुद्धि के बीच समन्वय से ही हम तमोगुण से बच सकते हैं। बुद्धि तभी निर्मल और पवित्र होगी, जब हम सदगुणों को आत्मसात करेंगे। सत्संग और भगवान की कथा हमारे विवेक को सही दिशा में ले जाते हैं। शिव पुराण पाप से निवृत्त होने की कथा है। पाप का मूल लोभ या मोह होता है जबकि पुण्य का मूल धर्म होता है। आजकल भक्ति के नाम पर प्रदर्शन और आडम्बर ज्यादा हो रहा है। लोग कुम्भ स्नान तब तक पूरा नहीं मानते, जब तक स्नान की तस्वीर फेसबुक पर वायरल नहीं हो जाती।
तिलक नगर क्षेत्र के कृषि विहार उद्यान स्थित श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही शिव महापुराण कथा में श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात आचार्य पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पूर्व यजमान समूह की ओर से पिंटू नामदेव-नीता मिश्रा, एमआईसी सदस्य राजेश उदावत, छत्रपाल सोलंकी, संजय खादीवाला एवं विजय मिश्रा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिवपुराण का पूजन किया। व्यासपीठ पूजन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। संयोजक पिंटू नामदेव ने बताया कि पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री 25 अगस्त तक यहाँ प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक शिवपुराण कथामृत की वर्षा करेंगे। कथा के दौरान शिवलिंग पूजन विधि, भस्म एवं रूद्राक्ष महिमा, पार्वती जन्मोत्सव, शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म प्रसंग, तुलसी-जालंधर कथा, शिवरात्रि व्रत कथा, जप का महात्यम सहित भगवान शिवाशिव की आराधना से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की संगीतमय व्याख्या होगी। कथा में विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे। कथा में मनोहारी भजनों पर थिरकने का सिलसिला भी चल रहा है। भजन गायिका नीता मिश्रा के भजनों का जादू और सम्मोहन भक्तों को खूब रास आ रहा है।
पं. शास्त्री ने कहा कि थोड़ी सी सफलता मिलते ही हमें अहंकार घेर लेता है। चिंतन करें कि भगवान भी कर्ता हैं, वे सृष्टि का पालन-पोषण और निर्धारण करने जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं, उन्हें तो कभी अहंकार नहीं होता, लेकिन हम छोटी सी उपलब्धि के श्रेय का सेहरा अपने माथे पर बांधने में देर नहीं करते। यह अहंकार ही हमारे पतन का मुख्य कारण बन जाता है। लोभ और मोह हमारे विकारों को जन्म देता है। कर्तापन का अहंकार हमेशा हमारे आसपास रहता है। शिव पुराण की कथा हमें अपने कर्मों के लिए सही दिशा की ओर ले जाने वाली कथा है, यह हमारे विवेक की जागृति का मार्ग भी बताती है। जिस दिन हम पापमुक्त हो जाएंगे, हमारा विवेक भी जागृत हो उठेगा। हमारे सारे कर्म सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण से भरे होते हैं। शिव पुराण की कथा की महत्ता इतनी है कि यदि हम भूले से भी कथा स्थल पर पहुँच जाएं तो उसका भी पुण्य मिलता ही है।
