दशहरा मैदान पर चल रही श्रीराम शौर्य कथा में उमड़ रहा भक्तों का सैलाब – अयोध्या काण्ड का भावपूर्ण चित्रण

इंदौर, । देश में आज धर्म, संस्कृति, मर्यादा और चरित्र के नाम पर जो कुछ बचा है वह हमारी मातृशक्ति के त्याग और समर्पण का ही नतीजा है। स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा चिंतन को इस बात का होना चाहिए कि जिस बाबर, गजनी और गजनवी ने हमारे असंख्य मन्दिरों को ध्वस्त किया, हमारी माता-बहनों को बेआबरू किया और सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस देश की अपार धन संपदा एवं वैभव पर डाका डाला, उनके नाम पर कोई स्मारक या मस्जिद का निर्माण कोई कैसे करा सकता है। राम कथा केवल कथा नहीं, भारतीय संस्कृति का गौरवशाली वह दस्तावेज है जिससे देश के जन-जन की आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है। अयोध्या काण्ड का मंथन करें तो समझा जा सकता है कि एक आदर्श परिवार कैसा होता है।
ये दिव्य विचार हैं मानस मर्मज्ञ आचार्य शांतनु महाराज के जो उन्होंने छवि सोशल वेलफेयर सोसायटी एवं श्री अग्रवाल समाज इंदौर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को दशहरा मैदान स्थित रामायण वाटिका पर चल रहे श्रीराम शौर्य कथा के दिव्य अनुष्ठान में व्यक्त किए। समाजसेवी टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, राधेश्याम गुरूजी, श्रवण सिंह चावड़ा, गोपाल अग्रवाल दया, रणजीत हनुमान मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास, महापौर प्रतिनिधि भरत पारिख, हरिनारायण यादव, रामस्वरूप गहलोत, सिख समाज के रिक्की गांधी, अखिलेश गोयल, राजू समाधान, पिंकेश मोदी, विकास जिंदल, पवन खनवे, हेमंत पटेल, अक्षय सोडानी, सुनील अग्रवाल बडगोंदा, रीतेश पाटनी, रामप्रकाश गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने आयोजन समिति के गोपाल गोयल, किशोर गोयल, संजय बांकडा, संदीप गोयल के साथ आचार्यश्री का स्वागत कर व्यास पीठ का पूजन एवं आरती में भी भागीदारी दर्ज कराई। कथा श्रवण के लिए आज भी समूचा पंडाल श्रोताओं से भरा रहा। कथा के दौरान भजनों और गीतों पर भक्तों के नाचने गाने का सिलसिला आज भी जारी रहा। आचार्य श्री ने सिख गुरु गोविंद सिंह और उनके बेटों की शहादत का भी भावपूर्ण चित्रण किया।
कथामृत वर्षा – अयोध्या काण्ड के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि मंथरा और कैकेयी इस काण्ड के मुख्य पात्र हैं। राम राज्य केवल भाषण और जयघोष से नहीं आएगा। अवध में अब राम राज्य की तैयारियां शुरू हुई थी तब देवताओं ने मंत्रणा कर आपात
बैठक की और देवी सरस्वती से आग्रह किया कि वे एक ऐसा पात्र चुनें जिसकी बुद्धि को विकृत किया जा सके। अयोध्या में जन्म लेने वाला तो कोई भी इसके लिए उपयुक्त नहीं था इसलिए मंथरा को चुना गया। मंथरा दहेज़ के रूप में आई थी। दहेज़ की प्रथा आज भी हमारे समाज में चल रही है। दहेज़ माँगा नहीं जाना चाहिए, पिता अपनी पुत्री को स्वेच्छा से जो कुछ देते हैं वह बेटी का धन होता है। दहेज़ की प्रथा मानवता का क्षरण है। समाज में आज भी अनेक परिवार है जहाँ दहेज़ के लिए बेटियों को सताया जा रहा है। आचार्य शांतनु जी ने बहुत मार्मिक शब्दों में लोगों से कहा कि मृत्यु के बाद यह धन और पैसा किसी काम नहीं आएगा। मृत्यु के बाद परिवार के ही लोग सोने-चांदी के जेवर को हमारे अंग काटकर निकाल लेते हैं। न सोना काम आएगा न चांदी आएगी, सजधजकर जिस दिन मौत की सहजादी आएगी भजन भी उन्होंने सुनाया। अयोध्या काण्ड के प्रसंगों का बहुत भावपूर्ण चित्रण करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के चरित्र में किंचित भी दोष नजर नहीं आता। वे माता पिता के भी आज्ञाकारी हैं, अपने भाइयों के भी प्रेमी हैं, अपने पतिधर्म को भी निभाते हैं और एक पुत्र होने के नाते कैकेयी द्वारा मांगे गए वरदान का पालन करने के लिए भी तत्पर रहते हैं। जिसका अगली सुबह राज्याभिषेक होना हो उसे तत्काल राजभवन छोड़कर 14 वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ा हो, और ख़ुशी-ख़ुशी उन्होंने यह सब शिरोधार्य कर लिया, यह उनके चरित्र का श्रेष्ठतम प्रसंग है जो आज हजारों वर्ष बाद भी उन्हें जन-जन का वन्दनीय और पूजनीय आराध्य बनाए हुए है।
संयोजक गोपाल गोयल ने बताया कि कथा स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए बैठक व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई, सुरक्षा, रोशनी, प्राथमिक चिकित्सा, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड एवं निशुल्क वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी अन्नपूर्णा थाने वाले मार्ग पर की गई है। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक होगी तथा शिवलिंग का जलाभिषेक सुबह 7.30 बजे से शाम 6 बजे तक प्रतिदिन 8 दिसम्बर तक हो सकेगा। कथा स्थल पर गुजरात के कलाकारों द्वारा 1.51 रुद्राक्ष से निर्मित 13 फीट ऊँचे शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए रविवार को भी दिनभर भक्तों की कतारे लगी रही। प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को प्रतिदिन संध्या को आरती के बाद रुद्राक्ष का भी प्रसाद बांटा जा रहा है। आचार्य शांतनु ने भी आज सबसे पहले इस शिवलिंग का जलाभिषेक किया।
