अरणि मंथन के साथ शुरू होगी स्वाहाकार की मंगल ध्वनि –यज्ञशाला के समानांतर 8 हजार वर्गफुट में परिक्रमा मार्ग का निर्माण

इंदौर । बंगाली चौराहा, मयूर हॉस्पिटल के पास स्थित मैदान पर हो रहे विराट लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ देश के जाने-माने संतों, विद्वानों एवं महंतों के सानिध्य में गुरुवार 8 जनवरी को सुबह 10.30 बजे यज्ञ स्थल से खजराना गणेश मन्दिर तक दिव्य कलश यात्रा के साथ होगा। 51 कुण्डीय इस महायज्ञ का आयोजन शहर में करीब 20 वर्षों के लंबे अन्तराल से हो रहा है जिसमें मालवांचल के अनेक जिलों के श्रद्धालु शामिल होंगे। यज्ञ में अरणि मंथन की प्रक्रिया 9 जनवरी को होगी जबकि 8 जनवरी को सुबह 7.30 बजे से यज्ञ में शामिल होने वाले यजमानों का क्षोर क्रम, दशविध स्नान एवं शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू होगी जो 10 बजे तक संपन्न होगी। यज्ञ का यह वृहद अनुष्ठान प्रख्यात संत ब्रह्मलीन देवराहा बाबा के परम शिष्य महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज (आगरोद) के सानिध्य में हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक काशी के प्रख्यात यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे और उनके साथ आए सात अन्य विद्वान याज्ञिक अनुष्ठान संपन्न कराएँगे। यज्ञशाला की परिक्रमा भी स्वाहाकार की मंगल ध्वनि के साथ प्रारंभ हो जाएगी। करीब 8 हजार वर्गफुट क्षेत्र में यज्ञशाला के साथ परिक्रमा मार्ग भी बनाया गया है।
यज्ञ की आयोजन समिति के प्रमुख देववृत पाटीदार ने बताया कि महायज्ञ में शामिल होने के लिए गुवाहाटी से निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी केशवदास महाराज, महामंडलेश्वर भरतदास महाराज, पंचकुईया राम मंदिर के महामंडलेश्वर रामगोपाल दास महाराज, फौजी बाबा रामकृपाल दास, बद्रीनाथ धाम से महंत गोविन्ददास, हरिद्वार से महंत रामदास, वृंदावन से मनमोहन दास, महंत रघुनाथ दास, महंत विजय दास सहित बड़ी संख्या में मालवांचल के अनेक प्रमुख धर्मस्थलों के संत-महंत सानिध्य प्रदान करेंगे। यज्ञ में गाय के शुद्ध घी, गोबर के कंडों, पलाश, चन्दन, वट, पीपल एवं आम की लकड़ी सहित 100 से अधिक तरह की औषधियों, वनस्पति एवं जड़ी-बूटी से निर्मित समिधा एवं तिल, जौ, चावल, खांड, कमलगट्टा, सफ़ेद एवं लाल चंदन, बेल्वपत्र, भोजपत्र, गूगल आदि का प्रयोग भी होगा। 20 वर्ष पूर्व इस तरह का महायज्ञ दशहरा मैदान पर देवराहा बाबा की प्रेरणा से आयोजित हुआ था। उसके बाद अब यह अनुष्ठान हो रहा है।
प्रतिदिन ढाई लाख आहुतियाँ – यज्ञ में प्रतिदिन करीब 2.50 लाख आहुतियाँ 151 यजमानों द्वारा प्रदान की जाएंगी। सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय की कामना के साथ ही यज्ञ में शामिल होने वाले यजमान परिवारों, परिक्रमा करने वालों और यज्ञ की व्यवस्था में प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से भागीदार बनने और सहयोग करने वालों के कल्याण के उद्देश्य से किए जा रहे इस महायज्ञ की पूर्णाहुति 14 जनवरी मकर संक्रांति को अपराह्न 4 बजे होगी। उसी दिन यज्ञ स्थल पर विशाल भंडारा भी होगा जिसमें प्रतिदिन अपने साथ घरों से एक पाव मूंग की दाल और एक पाव चावल से निर्मित खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया जाएगा। यज्ञ के सूत्रधार महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज ने यज्ञ में आने वाले सभी भक्तों से आग्रह किया है कि वे अपने साथ दाल एवं चावल लेकर आएं और यज्ञ स्थल पर रखे पात्र में समर्पित करें। इसी दाल चावल से खिचड़ी प्रसाद बनाकर वितरण किया जाएगा।
शुभारंभ कलश यात्रा से – यज्ञ में मुख्य यजमान अनिल पाटीदार और गंगाजलि पर बैठने वाले अर्जुन पाटीदार ने बताया कि यज्ञशाला का निर्माण बदनावर के आदिवासी हीरालाल भूरिया और उनके साथ ही 15 लोगों ने 20 दिनों के लगातार परिश्रम से किया है। शुभारंभ अवसर पर निकलने वाली शोभायात्रा में बैंड-बाजे, परंपरागत वाद्ययन्त्र, भजन एवं गरबा मंडलियाँ तथा बाहर से आए संत-महंत और विद्वान भी शामिल होंगे। महिलाऐं देश की पवित्र नदियों के जल से भरे कलश मस्तक पर लेकर चलेंगी। यज्ञ स्थल से सर्विस रोड से कलश यात्रा खजराना गणेश मंदिर पहुंचकर पुनः यज्ञ स्थल आएगी जहाँ संत-विद्वानों के आशीर्वचन भी होंगे।
परिक्रमा मार्ग भी तैयार – यज्ञ शाला में ब्रह्मा और प्रधान कुंड सहित 51 कुंड बनाए गए हैं जिन पर 151 यजमान बैठेंगे। यज्ञ स्थल पर 5 बीघा क्षेत्र में यज्ञशाला, परिक्रमा मार्ग, कार्यालय, संत निवास, अतिथि निवास आदि का निर्माण किया गया है। 5 बीघा क्षेत्र में वाहनों के पार्किंग की निशुल्क व्यवस्था रखी गई है। यज्ञ स्थल पर प्रवेश निशुल्क रहेगा। 9 जनवरी से परिक्रमा का क्रम शुरू हो जाएगा। यज्ञ में भागीदारी के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला बुधवार से शुरू हो गया है।
