श्रीनगर मेन स्थित गार्डन पर चल रही शिव पुराण कथा में धूमधाम से मनाया गया शिव-पार्वती विवाह का उत्सव

इंदौर
हमारी गृहस्थी की गाड़ी भी श्रद्धा और विश्वास के दो पहियों पर ही चलती है। दोनों पहियों में संतुलन बनाकर रखना हमारे विवेक पर निर्भर है। भगवान शिव करूणा के अवतार हैं। करुणा अर्थात प्राणी मात्र के लिए सदभाव। केवल ईश्वर की पूजा करने और संसार के प्राणियों से बेर भाव ऱखने वालों से शिव कभी प्रसन्न नहीं हो सकते। शिव पुराण कथा पाप से निवृत्त होने की कथा है। शिव श्रद्धा और पार्वती विश्वास के प्रतीक हैं। गृहस्थ धर्म को सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण कर्तव्य माना गया है। समाज और परिवार के साथ रहते हुए हम अपने दायित्वों को किस तरीके से निभाएं, यह मंत्र शिव पुराण कथा और शिव परिवार से भी मिलता है।
प्रख्यात आचार्य पं. विष्णुदत्त शर्मा महर्षि ने बुधवार को श्रीनगर मेन स्थित गार्डन पर खत्री महिला मंच एवं खत्री सभा इंदौर की मेजबानी में चल रही महाशिवपुराण कथा के तीसरे दिवस उपस्थित भक्तों को शिव-पार्वती विवाह सहित विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का जीवंत उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। ढोल-ढमाकों सहित नंदी बैल एवं गाड़ी में सवार भगवान शिव की बारात भी निकाली गई और वर-वधू पक्ष की ओर से मेहमानों का स्वागत भी किया गया। प्रारंभ में खत्री सभा के अध्यक्ष प्रदीप बिरदी, प्रबोध आहूजा, निर्मल महरा, श्याम मेहता तथा महिला मंच की ओर से श्रीमती रीता टंडन, श्रीमती उर्वशी बिरदी, ममता सेठ, साधना कपूर, इंदु टंडन, वंदना मेहता, रेणु टंडन, पूनम चोपड़ा एवं श्रीमती मोहिनी भयाना आदि ने वैदिक मंगलाचरण के बीच व्यास पीठ की पूजा-अर्चना की। कथा के दौरान विद्वान वक्ता ने भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बिल्वपत्र की उत्पत्ति, उसकी महत्ता, शिव पूजा में बिल्वपत्र के अर्पण से होने वाले लाभों का विस्तार से वर्णन किया। पार्थिव शिवलिंग पूजन की विधि भी विस्तार से समझाई और कहा कि पार्थिव का निर्माण मंत्र जाप करते हुए ही करना चाहिए, जिसकी ऊंचाई चार उँगलियों की होना चाहिए।
कथा में बुधवार को भी मनोहारी भजनों पर कथा पांडाल में भक्तों के झूमने-थिरकने का सिलसिला चलता रहा। महिला मंच की प्रमुख श्रीमती रीता टंडन एवं ममता सेठ ने बताया कि आचार्य पं. महर्षि यहां प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक शिव महापुराण कथा की संगीतमय कथामृत की वर्षा कर रहे हैं। इस दौरान कार्तिकेय जन्म प्रसंग, तुलसी-जालंधर कथा, शिवरात्रि व्रत कथा, जप का महत्व एवं भगवान शिवाशिव की आराधना से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या होगी।
आचार्य पं. शर्मा महर्षि ने कहा कि कथा श्रवण से पाप मुक्त होते ही हमारा विवेक भी जागृत हो उठेगा। सत्संग और शिव पुराण कथा हमारे विवेक को सही दिशा में ले जाते हैं। जब तक हमारी बुद्धि निर्मल और पवित्र नहीं होगी, तब तक हम तमो गुण और रजो गुण से घिरे रहेंगे। जीव मात्र के प्रति दया और सदभाव का पर्यावरण ही हमें अपने मनुष्य होने का अहसास कराएगा। दुर्लभ मनुष्य जीवन की धन्यता तभी संभव है, जब हम अपने कर्मों से ही नहीं, बल्कि सोच और विचार में भी पीड़ित मानवता की सेवा का भाव रखेंगे।
