इंदौर क्यों बनता जा रहा हादसों का शहर सितंबर 2025 इंदौर के लिए मानो त्रासदियों का महीना बनकर आया
है।
हादसों का ऐसा सिलसिला देखने को मिला जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया और सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कन्यू इंदौर हादसों का शहर बनता जा रहा है।
अस्पताल में मासूम चीखें थमीं, सड़कों पर सपने कुचले गए और घर ही मलबा बनकर ढह गया ये हादसे इत्तेफ़ाक़ नहीं, चेतावनी हैं जन आक्रोश के मुखर स्वर और दिल दहला देने वाली गमगीन पौड़ा की दास्तान से ही जागो सरकार जागो ! एमवाय अस्पताल का चूहा कांडः ने अस्पताल के जबाबदेह अधिकारी के झूठ और अस्पतालों की स्वच्छता, सुरक्षा और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। वंही एयरपोर्ट रोड हादसे ने सड़कों पर सुरक्षा का स्तर क्या है, यह उजागर कर दिया।
इंदौर उज्जैन रोड बस हादसा सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि यातायात व्यवस्था, भारी वाहनों की निगरानी और सड़क सुरक्षा नियमों की पोल खोलने वाला आईना है, और रानीपुरा बिल्डिंग हादसा सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर नगर निगम और बिल्डिंग परमिट देने वाली एजेंसियाँ क्या सिर्फ कागजों में जांच करती हैं? जो मकान गिरा उसका नाम खतरनाक मकानों की सूची में ही सम्मिलित नहीं था निगम की माने तो पूरे शहर में पुराने और जर्जर मकानों की संख्या मात्र 92 है जो की खतरनाक स्थिति में है, सर्वे पर कार्यवाही कौन करेगा यह जवाबदेही निश्चित नहीं है।
इन चार घटनाओं ने साबित किया है लचर प्रणालीगत व्यवस्था लगातार मौतों और हादसों की जड़ है।
जिम्मेदारों की प्राथमिकताओं के अनुसार स्वच्छता है
अभियान, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और कई अन्य योजनाओं पर करोड़ों खर्च हुए और अब इन्हें प्रमोट करने के लिए भी शहर में लगातार हो रहे इवेंट्स पर लाखों खर्च हो रहे हैं, लेकिन बुनियादी सुरक्षा, स्वास्थ्य और ढांचे की निगरानी में कोताही बरती जाती है। जवाबदेही से बचने का वरद हस्त एक पैटर्न बन गया है हादसे के बाद अफसर प्रेस नोट जारी कर देते हैं, मीडिया बाइट्स दे देते हैं, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं होती।
जनता का भरोसा अब अपनी सीमा की अंतिम पराकाष्ठा पर है अस्पतालों में इलाज, सड़कों पर यात्रा, और घरों की दीवारों पर जिंदगी दाँव पर लगी कब कौन अपना जाने कैसे बिछड़ जाएगा नहीं पता।
शासन प्रशासन से हर इंदौरी की अपेक्षा है की अस्पतालों में सफाई और सुरक्षा पर स्वतंत्र ऑडिट हो ताकि एमवाय जैसी घटनाएँ फिर न दोहराई जा सके
ट्रैफिक मैनेजमेंट और हैवी व्हीकल पर सख्त निगरानी की व्यवस्था हो एयरपोर्ट रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर चौकसी और तकनीकी नियंत्रण (स्पीड कैमरे, GPS ट्रैकिंग )
जर्जर इमारतों का सर्वे अनुसार नगर निगम पुराने मकानों की पहचान कर उन्हें तुरंत खाली करवाये और पुनर्निर्माण की योजना हो । जवाबदेही तय कर हर हादसे में सिर्फ कर्मचारियों पर कार्यवाही नहीं, अपितु शीर्ष अधिकारियों और विभागीय प्रमुखों पर भी जिम्मेदारी तय हो । सितंबर की यह घटनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि इंदौर की असली परीक्षा सिर्फ सफाई अभियान या पुरस्कार जीतने से नहीं होगी, बल्कि इस बात से होगी कि यहाँ मानव जीवन कितना सुरक्षित है.. – विजय दुबे
