
साउथ तुकोगंज स्थित नाथ मंदिर पर मराठी में देवी भागवत कथा सुनाते हुए गुरुमाता स्थितप्रज्ञानंद सरस्वती ने कहा
इंदौर आज के युग में गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए धर्म सबसे अनिवार्य तत्व है। देवी भागवत में मृत्यु के भय से मुक्ति और श्रेष्ठ जीवन दर्शन के सन्देश निहित हैं। हमारे पवित्र धर्म ग्रंथों की रचना “असतो माँ सदगमय” के संकल्प को पूरा करने के लिए ही हुई हैं क्योंकि मानव जीवन की मूल प्रवृत्ति हमेशा नित्य, शाश्वत और लम्बे समय तक टिके रहने वाले सत्य की खोज करने की रही है। देवी भागवत का मूल सन्देश यही है कि संसार के हर एक जीव, विशेषकर मातृशक्ति में एक असीम दैवीय शक्ति विद्यमान है जिसे पहचानना और सम्मान देना ही सच्चे धर्म की स्थापना है।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं श्रुति सागर आश्रम फुलगांव पुणे की प्रख्यात आध्यात्मिक गुरुमाता स्थितप्रज्ञानंद सरस्वती के, जो उन्होंने साउथ तुकोगंज स्थित श्रीनाथ मंदिर संस्थान पर पुरुषोत्तम मास के पावन प्रसंग पर सोमवार से प्रारंभ हुए देवी भागवत ज्ञान यज्ञ के दिव्य आयोजन में उपस्थित देशभर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पूर्व नाथ मंदिर संस्थान में भागवतजी की शोभा यात्रा भी निकाली गई। गुरुमाता ने मराठी भाषा में देवी भागवत की कथा सुनाते हुए अपनी रोचक शैली में अनेक पौराणिक प्रसंग भी बताए।
उन्होंने कहा कि देवी भागवत मृत्यु के भय से मुक्ति के साथ ही श्रेष्ठ जीवन जीने का मार्गदर्शन करती है। इस कथा में राजा परीक्षित के माध्यम से कहा गया है कि जब जीवन के केवल 7 दिन ही शेष बचे हों, तब मनुष्य को क्या करना चाहिए। इस गंभीर प्रश्न का उत्तर वेद व्यास ने भागवत के 18 हजार श्लोकों में दिया है जबकि देवी भागवत में इसी प्रश्न का और अधिक अर्थपूर्ण और व्यवहारिक निरूपण किया गया है। हमारे 18 पुराण और उपपुराणों में मानवजाति को श्रेष्ठ संस्कारों और जीवन जीने की कला बताई गई है। देवी भागवत में राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेंजय, पांडवों के वनवास, नवदुर्गा और दशमहाविद्या के रहस्यों का भी विस्तृत विवरण मिलता है।
नारी के प्रति समाज के दृष्टिकोण को बदलने, गुरु की महिमा, भारतीय संस्कृति में माँ और मातृत्व, नवरात्रि में किए जाने वाले जागरण आदि विषयों की व्याख्या करते हुए विद्वान वक्ता ने कहा कि संसार के हर एक जीव, विशेषकर नारी में एक असीम दैवीय शक्ति विद्यमान है, जिसे पहचानना और सम्मान देना ही सच्चे धर्म की स्थापना है। कथा में शामिल होने के लिए शहर के अलावा महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाथ मंदिर आए हुए हैं।
कथा में 22 और 23 मई को लोककल्याण की भावना से नवचंडी स्वाहाकार यज्ञ, शनिवार 23 मई को सुबह 9 बजे से कुमकुमार्चन विधि का अनुष्ठान भी होगा जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं शामिल होंगी। रविवार 24 मई को दोपहर में कन्या पूजन के साथ इस सात दिवसीय महोत्सव का विधि-विधान के साथ समापन होगा। संस्थान के पदाधिकारियों ने धर्म प्रेमी जनता से पुरुषोत्तम मास में हो रहे इस आयोजन का पुण्य लाभ उठाने का आग्रह किया है।
