मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मंत्रियों और विभागों की समीक्षा बैठकों के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जीतू पटवारी ने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की प्रक्रिया को लेकर तंज कसते हुए कहा कि जब मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जा रही है, तो सबसे पहले यह देखना चाहिए कि उनके पास निर्णय लेने के अधिकार कितने हैं। पटवारी ने कहा कि मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड देखने के लिए पीएस और अधिकारी बैठे हैं। कैबिनेट मंत्रियों को अधिकारी चेक करेंगे, यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले मंत्रियों को अधिकार तो दीजिए। आखिर उनके पास स्वतंत्र रूप से काम करने की कितनी ताकत है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार में मंत्रियों की भूमिका सीमित होती जा रही है और हर फैसले में मुख्यमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि “मुख्यमंत्री जी को बताना चाहिए कि क्या कोई मंत्री स्वतंत्र रूप से काम कर सकता है? हर विभाग में मुख्यमंत्री का कितना हस्तक्षेप होता है, यह भी जनता को पता चलना चाहिए।” जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “अगर मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड बन रहा है तो मुख्यमंत्री के पास मौजूद विभागों का भी रिपोर्ट कार्ड सामने आना चाहिए। सरकार केवल दिखावे की समीक्षा कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह अधिकारियों के भरोसे चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में मंत्रियों की स्थिति केवल औपचारिक होकर रह गई है और वास्तविक निर्णय नौकरशाही के जरिए लिए जा रहे हैं। पटवारी के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
