हवा बंगला स्थित हरिधाम आश्रम पर भारत मिलाप एवं वनवास काल के प्रसंगों को सुनकर आल्हादित हुए हजारों श्रोता

इंदौर राम कथा उस गंगा की तरह है, जो 88 हजार बरसों से भारतीय समाज को भक्ति, मर्यादा और संस्कृति की त्रिवेणी में स्नान कराते आ रही है। गंगोत्री से निकली गंगा भले ही मैली हो गई हो, हमारे तुलसी की गंगा तो आज भी निर्मल और पावन बनी हुई है। राम कथा केवल 3 घंटे बैठकर श्रवण करने के लिए ही नहीं है, राम परिवार के आदर्शों और संस्कारों को अपने जीवन में उतारने के लिए भी है। राम कथा में प्रभु राम से जुड़े प्रत्येक पात्र का कोई जोड़ नहीं। एक ही कथा में एक आदर्श परिवार के संस्कारों का समावेश यदि किसी दस्तावेज में देखना है तो वह सिर्फ राम कथा ही हो सकती है।
ये दिव्य विचार हैं श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात कथाकार पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज के, जो उन्होंने हवा बंगला, कैट रोड स्थित हरिधाम आश्रम पर चल रही राम कथा में भरत मिलाप एवं वनवास काल के अन्य प्रसंगों की भावपूर्ण व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। आज भी वृन्दावन से आए भजन गायकों एवं संगीतज्ञों की प्रस्तुतियों ने हजारो भक्तों को थिरकाए रखा। कथा शुभारंभ के पूर्व आश्रम के अधिष्ठाता महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य में न्यायमूर्ति एस के गुप्ता, न्यायाधीश अतुल सराफ, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, समाजसेवी विष्णु बिंदल, टीकमचंद गर्ग, दिनेश मित्तल, गोपाल गोयल, डॉ. सुरेश चोपड़ा, ललित अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी विजय सिंह राणा, ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, गुमान सिंह ठाकुर आदि ने की। कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन शहर के साथ आसपास के 25 गांवों के श्रद्धालु आ रहे हैं। हरिधाम पर सुबह 8 से दोपहर 1.30 बजे तक हनुमत महायज्ञ और दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक श्रीराम कथा में भक्तों का सैलाब निरंतर बना हुआ है। स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ता भी व्यवस्थाएं सँभालने में सहयोग कर रहे हैं।
विद्वान वक्ता ने कहा कि हम बरसों से राम कथा और अन्य पात्रों के बारे में सुनते आ रहे हैं लेकिन बार-बार सुनने के बाद भी हमारी तृप्ति नहीं हो पा रही है। यह अतृप्ति ही हमारी भक्ति का प्रमाण है। रामायण और भागवत-गीता ग्रन्थ नहीं, जीवन जीने के मंत्र हैं। इस अनमोल खजाने को हमें अब भी विरासत में नई पौध को नहीं सौंपा तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ़ नहीं करेगी। हमें सम्पत्ति सौंपने की तो याद रहती है, संस्कार सौंपना क्यों भूल जाते हैं। राम नाम से बड़ा कोई सत्य नहीं हो सकता जो जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे साथ जुड़कर हमारी जीवन यात्रा में मार्गदर्शन करते आ रहा है।
हनुमत महायज्ञ – आश्रम पर यज्ञाचार्य पं. ललित पाठक के निर्देशन में 51 विद्वानों द्वारा प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर 1.30 बजे तक आश्रम परिसर में निर्मित यज्ञशाला में हनुमत महायज्ञ में “कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहीं होइ तात तुम पाहीं” महामंत्र से 1 लाख 60 हजार आहुतियाँ समर्पित की जा रही हैं। अब तक यहाँ 11 लाख लक्ष्य के मुकाबले 9 लाख 60 हजार आहुतियाँ समर्पित की जा चुकी हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यजमान के रूप में सपत्निक यहाँ आकर विश्व शांति एवं आत्मकल्याण के उद्देश्य से आहुतियाँ समर्पित कर रहे हैं। यज्ञ शाला की परिक्रमा करने वालों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। सुबह हनुमत महायज्ञ एवं दोपहर में श्रीराम कथा के दिव्य अनुष्ठान के कारण समूचा हरिधाम क्षेत्र चौपाइयों, मन्त्रों और श्लोकों से की मंगल ध्वनि से गुंजायमान बना हुआ है।
