
पितरों की स्मृति में किया त्रिवेणी पौधारोपण, गौ सेवा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की
इंदौर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल के साथ इंदौर के प्रसिद्ध पितृ पर्वत स्थित श्री पित्रेश्वर हनुमान धाम मंदिर पहुंचकर भगवान हनुमान के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
मंदिर के पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन सम्पन्न कराया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने भगवान हनुमान की लगभग 72 फीट ऊंची अष्टधातु से निर्मित विशाल एवं भव्य प्रतिमा का अवलोकन भी किया। ध्यानमग्न मुद्रा में स्थापित यह प्रतिमा देश की प्रमुख हनुमान प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है और पित्रेश्वर धाम का प्रमुख आकर्षण है।
पितरों की स्मृति में किया त्रिवेणी पौधारोपण
मंदिर दर्शन से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने पितृ पर्वत परिसर में त्रिवेणी (नीम, बरगद एवं पीपल) का पौधारोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री पूनमचंद यादव एवं माताजी स्वर्गीय श्रीमती लीलाबाई यादव की पावन स्मृति में त्रिवेणी का रोपण किया। वहीं केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने अपने पिताजी स्वर्गीय श्री हरवंशलाल जी खट्टर तथा माताजी स्वर्गीय श्रीमती शांति बाई खट्टर की स्मृति में त्रिवेणी लगाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने गौ माता को रोटी खिलाकर गौसेवा का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से आह्वान किया कि बारिश के मौसम में एक पेड़ मां के नाम अवश्य लगाएं।
इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, राज्यसभा सदस्य श्री उमेशनाथ महाराज, विधायक श्री गोलू शुक्ला, श्री सुमित मिश्रा, पूर्व विधायक श्री आकाश विजयवर्गीय, श्री जीतू जिराती सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह तथा कलेक्टर श्री शिवम वर्मा भी मौजूद रहे।
आस्था, पर्यावरण संरक्षण और पितृ स्मरण का अद्वितीय केंद्र
पितृ पर्वत स्थित श्री पित्रेश्वर हनुमान धाम आज इंदौर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। यहां श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन के साथ-साथ अपने पितरों की स्मृति में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। यही विशेषता इस धाम को देश के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती है। विशाल हरित परिसर, आध्यात्मिक वातावरण और पितृ सम्मान की अनूठी परंपरा के कारण यह धाम श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है।
