
शिव मंदिर उद्यान में जलाधिवास-अन्नाधिवास से मूर्तियां होंगी ऊर्जावान; पं. जितेंद्र दुबे के सान्निध्य में 3 दिवसीय अनुष्ठान
इंदौर। छोटा बांगड़दा स्थित शिव मंदिर उद्यान परमहंस नगर में रविवार को ‘जय श्रीराम’ और ‘बजरंगबली की जय’ के उद्घोष के साथ श्रीराम दरबार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा के साथ भगवान राम दरबार का नगर भ्रमण के साथ शुरू हुए इस तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन में पूरा परमहंस नगर राममय हो गया।
सिर पर कलश लेकर निकलीं मातृशक्ति
आयोजक यादवेंद्र सिंह गौर “यादू” ओर पुष्पेंद्र सिंह गौर
ने बताया कि प्रातः10 बजे गाजे बाजे के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वस्त्र धारण कर सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर यात्रा में सहभागिता की। ढोल-नगाड़ों और भजनों की धुन पर निकली यात्रा में श्रद्धालु भगवान राम और भक्त हनुमान के जयकारे लगाते चल रहे थे। यात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई कार्यक्रम स्थल शिव मंदिर उद्यान पहुंची। कलश यात्रा में प्रमुख रूप से धीरज सिंह ,धर्मेंद्र सिंह गौतम, ईश्वर सिंह राठौड़, सुनील सिंह शेखावत एवं परमहंस नगर ,लक्ष्मी नगर , छोटा बांगड़दा से बड़ी संख्या भक्तगण शामिल हुए ।
जल, अन्न और शयन अधिवास से होगी प्राण प्रतिष्ठा
पं. जितेंद्र दुबे के सान्निध्य में विभिन्न वैदिक अनुष्ठानों के साथ भगवान श्रीराम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का क्रम शुरू हुआ। मुख्य यजमान श्रीमती रन्नो गौर और ठाकुर वीरेंद्र सिंह गौर ने सपत्नीक पूजन किया।आयोजक यादवेंद्र सिंह गौर “यादू” ओर पुष्पेंद्र सिंह गौर ने बताया कि पंडित दुबे के सान्निध्य में शास्त्रोक्त विधि से मूर्तियों को जलाधिवास, अन्नाधिवास, फलाधिवास, घृताधिवास और शय्याधिवास के माध्यम से शुद्ध और ऊर्जावान बनाया जाएगा । इस दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा वेद मंत्रों का सस्वर पाठ किया जा रहा है। नगर का वातावरण पूर्ण रूप से भक्तिमय हो गया है।
3 दिन चलेगा धार्मिक अनुष्ठान
आयोजन समिति के अनुसार 22 जून से प्रारंभ हुए इस आयोजन का समापन ,24 जून तक तीन दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिदिन हवन, रामचरितमानस पाठ, भजन संध्या और महाआरती होगी। पूर्णाहुति के बाद भीजन परसादी का आयोजन किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मनोहारी प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ स्थापित की जाएंगी।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के धर्मप्रेमी, समाजजन और मातृशक्ति शामिल हुई।
