इंदौर।
जूनी इंदौर मुक्ति धाम पर चल रही भागवत कथा के समापन पश्चात शुक्रवार को सुबह मुक्ति धाम पर पिछले करीब 12 वर्षों से रखी हुई 300 से अधिक दिवंगतों की अस्थियों को नर्मदा में विसर्जन के पूर्व विधि विधान से पूजन कर अस्थि कलश को विदाई दी गई। संयोजक अशोक सारडा एवं राजेश जोशी ने बताया कि आचार्य पं. राजेश तिवारी के निर्देशन एवं भागवताचार्य पं. श्याम सुंदर शास्त्री के सानिध्य में विद्वानों ने महामृत्युंजय मंदिर की साक्षी में इन सभी अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से पूजन कर ससम्मान नर्मदा तट पर विसर्जन के लिए विदा किया। समाजसेवी प्रमोद रामेश्वर खटोड एवं राहुल सोनकर के साथ उनके साथी भी खेड़ीघाट पहुंचे, जहाँ दोपहर में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोचार के बीच इन अस्थियों का विसर्जन किया गया।
संयोजक अशोक सारडा ने बताया कि जूनी इंदौर मुक्ति धाम पर वर्ष 2013 से अनेक दिवंगतों की अस्थियां संग्रहित कर रखी गई थी जिन्हें किन्हीं कारणों से उनके परिजन अपने साथ लेकर नही जा पाए थे। ऐसी करीब 300 दिवंगतों की अस्थियां मोक्ष धाम पर रखी हुई थीं जिन्हें आज पूजा-अर्चना के बाद विसर्जित कर दिया गया। समिति की ओर से सार्वजनिक सूचना देकर दिवंगतों के परिजनों से आग्रह किया गया था कि वे 30 जनवरी तक अपने दिवंगतों की अस्थियाँ मोक्ष धाम से ले जाएं। इस आग्रह के बाद कुछ परिजन तो मोक्ष धाम से अस्थियाँ लेकर चले गए लेकिन करीब 300 लोगों की अस्थियाँ लेने कोई नहीं आया। शास्त्रों में विधान है कि दिवंगतों की अस्थियों को उनके सगे-सम्बन्धियों द्वारा पवित्र नदियों में विसर्जित करना चाहिए तभी उन्हें जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल सकती है। मानवता के नाते समिति ने शुक्रवार को करीब 300 दिवंगतों की अस्थियों का विसर्जन कर दिया। शहर के अन्य मुक्ति धामों पर भी इसी तरह अनेक दिवंगतों की अस्थियाँ रखी हुई हैं। इसके लिए शहर के सामाजिक संगठनों को आगे आने की जरूरत है।
