खंडवा रोड स्थित अखंड परम धाम आश्रम पर सात दिवसीय ध्यान एवं योग शिविर का हुआ शुभारंभ

इंदौर जीव का स्वभाव शांति और मौज में रहने का है, लेकिन जरूरत से अधिक संग्रह की प्रवृत्ति के चलते हम दूसरों को दुख पहुंचाकर ज्यादा से ज्यादा धन संपत्ति के संग्रह में जुटे हुए हैं और यही हमारी अशांति की प्रमुख जड़ है। देह सब कुछ नहीं है। हम सबके अंदर ‘मैं’ मौजूद है। यह ‘मैं’ और ‘मेरा’ ही अहंकार का प्रमुख कारण है। हम भूल रहे हैं कि दुनिया में किसी को शांति तब तक नहीं मिल सकेगी, जब तक उसके कर्मों में सेवा का भाव नहीं आएगा। स्वास्थ्य श्रेष्ठ तभी रहेगा जब मन के विकार बाहर निकलेंगे। नशा करने वाले जिस तरह अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं उसी तरह हमें भी योग करने वालों की संख्या बढ़ाना होगी।
राम जन्मभूमि न्यास अयोध्या के न्यासी एवं युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने सोमवार शाम को अखंड परम धाम सेवा समिति के तत्वावधान में खंडवा रोड स्थित अखंड परमधाम आश्रम के परमानंद सभागृह पर सात दिवसीय 30वें ध्यान एवं योग शिविर का शुभारंभ करते हुए उक्त प्रेरक विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में साध्वी चैतन्य सिंधु, हरिद्वार से आए महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद, रायपुर से आए स्वामी परमात्मानंद, साध्वी आदित्य चेतना गिरि के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आश्रम परिवार की ओर से विजय शादीजा, सीए विजय गोयनका, श्यामलाल मक्कड़, विष्णु कटारिया, दिनेश गोयल, रामबाबू अग्रवाल, मुकेश राजानी, नरेन्द्र सोनी की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलन के साथ शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर को महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद, साध्वी आदित्य चेतना गिरि ने भी संबोधित किया। संचालन किया राजेश रामबाबू अग्रवाल ने एवं आभार माना समन्वयक विजय शादीजा ने। गुरुदेव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर विभिन्न संस्थाओं की ओर से उनका गरिमापूर्ण स्वागत किया गया।
आश्रम प्रबंध समिति के अध्यक्ष किशनलाल पाहवा, महामंत्री राजेश अग्रवाल एवं समन्वयक विजय शादीजा ने बताया कि खंडवा रोड स्थित अखंड परमधाम आश्रम पर 10 से 16 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे तक और संध्या 5 से 7 बजे तक आयोजित होगा। शिविर में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में देश के विभिन्न शहरों से साधक आए हुए हैं, जिनके लिए भोजन एवं आवास की व्यवस्था खंडवा रोड स्थित आश्रम पर की गई है। शिविर एवं अन्य सभी कार्यक्रम निःशुल्क हैं, लेकिन प्रवेश के लिए ‘पहले आएं पहले पाए’ आधार पर ही व्यवस्था रहेगी।
अपने आशीर्वचन में युग पुरुष स्वामी परमानंदजी ने कहा कि आज की व्यस्त दिनचर्या में योगाभ्यास बहुत जरुरी है। रोगों से मुक्त होना है तो योग करना पड़ेगा। मनुष्य के सुखी होने का साधन सत्संग है और शरीर से सुखी होने का साधन योग है। हम सन्यासी बनाकर कर्म से अलग नहीं करते बल्कि धर्म की राह पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। जीवन-मरण, गरीबी-अमीरी और स्वप्न एवं जागृति की अवस्था जीवन के क्रम हैं। जीवन में जागृति बहुत जरुरी है। योग गुरु बाबा रामदेव ने सारी दुनिया में योग के प्रचार प्रसार के लिए स्वयं को समर्पित कर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने भी योग दिवस घोषित कर दिया है। यहाँ प्रतिदिन सुबह योग एवं प्राणायाम की कक्षाएं चलेंगी उनमें भी बाबा रामदेव की ही तरह योग गुरु दाऊलालजी योग का प्रशिक्षण देंगे।
