अज्ञान, अहंकार और पाशविक प्रवृत्तियों का नाश करने के लिए शिव आराधना करें – पं. शास्त्री

इंदौर शिव का अर्थ की कल्याण है। प्राणी मात्र के लिए कल्याण और मुक्ति की प्राप्ति शिव पुराण के श्रवण से ही संभव है। शिव पुराण के श्रवण से भक्ति, भक्ति से प्रेम, प्रेम से सदभाव और सदभाव से भेदभाव मुक्त समाज का सृजन होता है। अज्ञान, अहंकार और समाज में व्याप्त पाशविक प्रवृत्तियों का नाश करने के लिए शिव आराधना और शिव पुराण जैसे ग्रंथों का मनन और मंथन जरूरी है। शिव पुराण भक्ति और मुक्ति का ग्रंथ है।
तिलक नगर क्षेत्र के कृषि विहार उद्यान स्थित श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही शिव महापुराण कथा में श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात आचार्य पं. शिवेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान शिव की भक्ति की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। कथा में द्वादश ज्योतिर्लिंग सहित भगवान शिव-पार्वती से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण चित्रण किया गया। भजन गायक नीता मिश्रा के मनोहारी भजनों के बीच राधा-कृष्ण के संग फूलों की होली भी खेली गई और भक्तों ने नाचते-गाते हुए विद्वान वक्ता को बिदाई दी। कथा शुभारंभ के यजमान समूह की ओर से पिंटू नामदेव-नीता मिश्रा, टीएम मंजू जैन, अजय-आशा सैनी, विजय-श्रुति अग्रवाल, अंकित-श्रद्धा राजे, संजय-योगिता जगताप, अतुल गौतम, अजय-आरती शर्मा, वर्षा शर्मा आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी सुनीता देशमुख, भावना जाट, सीमा मिश्रा, रचना सोनकर, कृष्णा पुरोहित, पिंकी पाण्डेय सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने की। शिवपुराण का पूजन राजेश उदावत, संजय खादीवाला, छत्रपाल सोलंकी एवं विजय मिश्रा ने किया। कथा समापन के पश्चात सुखद वर्षा की कामना के साथ यज्ञ-हवन के साथ पूर्णाहुति हुई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिव पुराण ग्रन्थ का पूजन किया। इस अवसर पर पं. मिश्रा का विधायक गोलू शुक्ला के आतिथ्य में क्षेत्र के भक्तों एवं आयोजन समिति की ओर से सम्मान भी किया गया।
पं. शास्त्री ने कहा कि शिव पुराण में प्राणी मात्र के अभ्युदय का भाव है। घर और परिवार बिखरने लगे हैं। घर और परिवार कैसे संभाले जाते है, यह शिव परिवार से सीखना चाहिए, जहां एक दूसरे के कट्टर दुश्मन भी एक साथ रहते हैं। भगवान शिव गले में सर्प धारण किए हुए हैं, जिनका दुश्मन कार्तिकेय की सवारी मोर है। गणेशजी की सवारी चूहा है जो सांप के निशाने पर रहता है, जबकि मोर के निशाने पर सर्प रहता है। विपरीत स्वभाव के लोगों को जोड़कर रखने का संदेश भगवान शिव ही देते हैं। अपने घर-परिवार को बचाने के लिए हमें अपने बच्चों को धर्मग्रंथों के माध्यम से सेवा, दया, करुणा और निर्भयता जैसे गुणों की शिक्षा देना होगी। सत्य की राह पर चलकर शिव की तरह कल्याणकारी और प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठता का लक्ष्य ही सत्यम, शिवम, सुंदरम के सूत्र वाक्य को चरितार्थ बनाएगा।
