हंसदास मठ पर संतों के सानिध्य में हुआ शुभारम्भ, प्रतिदिन सुबह निशुल्क तर्पण एवं दोपहर में होगी भागवत कथा

इंदौर, तर्पण हमारे सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण शास्त्रोक्त अनुष्ठान हैं जिससे पितृ दोष, कालसर्प दोष एवं जन्मकुंडली के ग्रहों के दोष भी नष्ट हो सकते हैं। हमारे यहां दीपावली, नवरात्रि, गणेश उत्सव एवं श्राद्धपक्ष जैसे उत्सवों का प्रावधान इसीलिए है कि हम अपने देवी-देवताओं और पितरों को प्रसन्न रख सकें। पितृमोक्षदायी भागवत के श्रवण से पितरों को तो मुक्ति मिलती ही है, हमारे पुण्यों का बैलेंस भी बढ़ता है। भागवत श्रवण से सुमति प्राप्त होती है, जो सबका कल्याण करती है।
ये दिव्य विचार हैं प्रख्यात भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के, जो उन्होंने शनिवार को एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ पर श्रद्धा सुमन सेवा समिति की मेजबानी में आयोजित पितृ मोक्षदायी भागवत ज्ञान यज्ञ में हंसपीठाधीश्वर श्रीमहंत रामचरणदास महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रामगोपालदास महाराज, सदगुरु श्री अण्णा महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में बैंड-बाजों सहित निकली भागवतजी की शोभा यात्रा और पितृ मोक्ष भागवत के शुभारंभ प्रसंग पर व्यक्त किए। तर्पण अनुष्ठान का शुभारंभ भगवान हरि विष्णु के पूजन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत कथा के मुख्य यजमान कालूराम–श्यामा पटेल दम्पत्ति, समिति के हरि अग्रवाल, राजेन्द्र सोनी, राजेन्द्र गर्ग, शंकरलाल वर्मा, महेंद्र विजयवर्गीय, श्रीधर खंडेलवाल, आशीष जैन, गोकुल माहेश्वरी, मुरलीधर धामानी ने किया। संतों की अगवानी उमेश गहलोत, गिरधर सोनी, जवाहरलाल शर्मा, पुरुषोत्तम मेडतवाल, दिलीप साहू आदि ने की। मातृशक्ति कीओर से राजकुमारी मिश्रा, सीमा सेन, गीता शर्मा, मंजू सोनी ने आरती में भाग लिया। इसके पूर्व सुबह के सत्र में 700 से अधिक साधकों ने अपने पितरों की पुण्य स्मृति में विधि विधानपूर्वक तर्पण किया। तर्पण के बाद निर्धनों, पशु-पक्षियों के लिए खीर प्रसाद, गौ सेवा, ब्राह्मण सेवा, देव दर्शन का भी साधकों ने पुण्य लाभ उठाया।
सुबह नियमित तर्पण, दोपहर में पितृ मोक्षदायी भागवत – समिति के हरि अग्रवाल एवं राजेंद्र सोनी ने बताया कि हंसदास मठ पर श्राद्ध पक्ष में रविवार से 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक तर्पण अनुष्ठान जारी रहेगा जबकि पितृ मोक्ष भागवत 3 से 9 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक जारी रहेगी। यह कथा स्व. छोगालाल पटेल, मातुश्री स्व. संपत बाई पटेल एवं शुभम पटेल की पावन स्मृति में हो रही है। आम श्रद्धालु यहां सुबह आकर निःशुल्क तर्पण कर सकेंगे। तर्पण में प्रयुक्त सभी सामग्री की व्यवस्था समिति द्वारा की जा रही है। जिन परिजनों को अपने पितरों के निधन की तिथि ज्ञात है, वे उस तिथि के दिन हंसदास मठ पहुंच जाएं। जिन्हें अपने पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को शामिल हो सकते हैं।
