‘अभिमान से पतन होता है, सत्कर्म से उद्धार’: देवी हेमलता शास्त्री, बोलीं- जीवन दूसरों की भलाई में लगाएं

इंदौर। हातोद-गांधीनगर रोड स्थित बुडानिया में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा और श्री महालक्ष्मी नारायण महायज्ञ में हजारों भक्तों ने दर्शन कर पुण्य लाभ लिया। शनिवार को महायज्ञ में 18 जोड़ों ने आहुतियां दीं और श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा की।
कथा में ध्रुव प्रसंग से दी सीख
आयोजक अंतर सिंह चौधरी और केदार सिंह चौधरी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचिका देवी हेमलता शास्त्री ने कथा में ध्रुव प्रसंग, नरसिंह और वामन अवतार प्रसंग सुनाए।
देवी हेमलता शास्त्री ने कहा, “जीवन में कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। अभिमान मनुष्य को वास्तविकता से दूर कर पतन की ओर ले जाता है। आज मनुष्य को गलती का पछतावा नहीं होता, क्योंकि उसे लगता है कि वह गलत नहीं हो सकता। बुद्धि, विवेक, ज्ञान के अभाव में गलत भी सही लगने लगती है।”
‘भगवान से विमुख होने पर पतन निश्चित’
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य ईश्वर पर विश्वास नहीं करता। ईश्वर पर विश्वास से आत्मबल, मनोबल और कार्यक्षमता बढ़ती है। सच्चे मन से ईश्वर पर छोड़ा काम अवश्य पूरा होता है।
“मनुष्य को भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। भक्ति मन से महादेव की आराधना करने पर सभी कष्ट, बाधाएं दूर हो जाती हैं। भगवान से विमुख होने वाले व्यक्ति का पतन हो जाता है।”
‘मानव कल्याण ही जीवन का उद्देश्य हो’
देवी जी ने कहा कि मनुष्य को वही काम करना चाहिए जिससे लोगों का कल्याण हो। मानव कल्याण ही जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। यही वह राह है जिस पर चलकर उद्धार हो सकता है। “स्वयं को पहचानें और अपना जीवन दूसरों की भलाई में लगाकर सत्कर्म के भागीदार बनें।”
