गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग से दिया धर्म और कर्म का संदेश, हरि कीर्तन में मौन नहीं रहने की सीख

इंदौर। पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर संस्था संगम द्वारा मोनी बाबा आश्रम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और ज्ञान की अमृतधारा का रसपान किया। कथा का वाचन परम पूज्य महंत मां भक्ति प्रिया जी ने अपने मुखारविंद से किया। कथा स्थल को आकर्षक धार्मिक सजावट से सजाया गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।संस्था संगम के संरक्षक विधायक रमेश मेंदोला, पार्षद श्रीमती संध्या राधाकिशन जायसवाल एवं मासूम जायसवाल ने बताया कि 17 मई से 23 मई तक प्रतिदिन शाम 4:30 बजे कथा आयोजित की जा रही है। दूसरे दिन कथा में गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि सत्संग और भगवान की भक्ति से ही जीवन के दुखों और विकारों से मुक्ति मिलती है।
महंत मां भक्ति प्रिया जी ने कहा कि वेदव्यास जी को समस्त ग्रंथों की रचना के बाद भी आत्मिक शांति नहीं मिली, तब नारद जी ने उन्हें भगवान की लीलाओं का वर्णन करने की प्रेरणा दी, जिससे श्रीमद् भागवत की रचना हुई। कथा में नारद जी के पूर्व जन्म का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसमें संत संग और सेवा के प्रभाव को विस्तार से समझाया गया।कथा के दौरान सनकादिक मुनियों द्वारा सूत जी से भागवत के महत्व को लेकर किए गए प्रश्नों और उनके उत्तरों का भी वर्णन किया गया। महंत मां भक्ति प्रिया जी ने कहा कि हरि कीर्तन में कभी मौन नहीं रहना चाहिए, क्योंकि भगवान का नाम ही कलियुग में सबसे बड़ा आधार है।उन्होंने कहा कि संतों और कथा का संग मन के विकारों को दूर कर विवेक जागृत करता है, जिससे व्यक्ति सही और गलत का निर्णय लेना सीखता है। भागवत हमें अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से करने और कर्मफल ईश्वर पर छोड़ने की प्रेरणा देती है।
