कैट रोड हवा बंगला स्थित हरिधाम पर श्रीराम कथा में आज होगा श्रीराम जन्मोत्सव

इंदौर राम का गुणगान शरीर के अंगों को पवित्र बनाता है। मन की पवित्रता के बिना की गई भक्ति सार्थक नहीं हो सकती। धर्म और सनातन संस्कृति के बिना मनुष्य का उत्थान नहीं हो सकता। भगवान शिव सचमुच भोले भंडारी हैं जो केवल जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें मेवा, मिष्ठान या 56 भोग की जरूरत नहीं। हम लाख बार मंदिर चले जाएं, रोज घंटों पूजा-पाठ कर लें, आरतियाँ भी गा लें लेकिन यदि मन में शुद्धता नहीं होगी तो हमारे ये सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएँगे। राम कथा जीवन के सभी संशयों को दूर करती है।
ये प्रेरक विचार हैं श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात कथाकार पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज के, जो उन्होंने हवा बंगला, कैट रोड स्थित हरिधाम आश्रम पर रविवार शाम को राम कथा में शिव पार्वती विवाह प्रसंग की व्याख्या करते हुए व्यक्त किए। आश्रम के अधिष्ठाता महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य में डॉ. सुरेश चोपड़ा, ललित अग्रवाल, राऊ के एसडी एम गोपाल वर्मा, बालकृष्ण छाबछरिया, संतोष कुमार सिंह, सुधीर अग्रवाल, विजय सिंह राणा आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। अतिथियों का स्वागत ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, सीताराम नरेडी एवं संस्कृत विद्यापीठ के बटुकों ने किया। श्रीराम कथा में सोमवार को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव प्रसंग होगा। कथा दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक हो रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण का पुण्य लाभ उठा रहे हैं। वृन्दावन के भजन गायक एवं संगीतकारों का जादू भी श्रोताओं पर सिर चढ़कर बोलने लगा है।
राम कथा की महिमा और शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान आचार्य पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि राम कथा का श्रवण हमें अविद्या के दोष से मुक्त कराता है। शिव श्रद्धा है तो पार्वती विश्वास। जीवन की गादी श्रद्धा और विश्वास के दो पहियों पर ही चल सकती है। शिव और पार्वती का विवाह श्रद्धा और विश्वास के समन्वय का प्रतीक है। कई बार हमें अपने श्रेष्ठ संस्कारों के लिए निज स्वार्थ का त्याग करना होता है। भगवान राम और शिव की महिमा का वर्णन कर पाना हमारे लिए संभव नहीं है लेकिन इतना तय है कि रामजी आनंद के सागर हैं और शिवजी संसार की समस्याओं का जहर अपने कंठ में उतारने वाले अनूठे देव हैं। रामजी के आचरण में सम्पूर्ण निर्दोषता है। जीवन में विनम्रता और दूसरों के सम्मान का भाव राम की तरह होना चाहिए। प्रणाम करने से अहंकार नष्ट हो जाता है बल्कि बुद्धि की भी शुद्धि हो जाती है।
हनुमत महायज्ञ – रविवार को सुबह आश्रम पर यज्ञाचार्य पं. ललित पाठक के निर्देशन में 51 विद्वानों ने आश्रम परिसर में निर्मित यज्ञशाला में चल रहे हनुमत महायज्ञ में “कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहीं होइ तात तुम पाहीं” महामंत्र से विश्व शांति, जन कल्याण एवं परिवार, समाज एवं राष्ट्र में सुख, शांति एवं सदभाव की कामना से आहुतियाँ समर्पित की। यहाँ प्रतिदिन 1 लाख 60 हजार आहुतियाँ विद्वानों एवं यजमानों द्वारा समर्पित की जा रही हैं। अब तक यहाँ 3 लाख 20 हजार आहुतियाँ समर्पित की जा चुकी हैं। महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8 से दोपहर 1.30 बजे तक हो रहा है। आज से यज्ञशाला की परिक्रमा भी प्रारम्भ हो गई है।
