जीवन के सभी संशयों को दूर करती है राम कथा – पं. शास्त्री

इंदौर, 2 जून। राम का गुणगान शरीर के अंगों के साथ मन को भी पवित्र बनाता है। मन की पवित्रता के बिना हमारी पूजा, अर्चना और भक्ति फलीभूत नहीं हो सकती। राम कथा जीवन के सभी संशयों को दूर करती है। राम कथा का श्रवण हमें अविद्या के दोष से मुक्त कराता है। शिव श्रद्धा और पार्वती विश्वास के प्रतीक हैं। शिव और पार्वती का विवाह इस बात का सूचक है कि हमारा जीवन भी श्रद्धा और विश्वास के दो पहियों की गाड़ी पर ही आगे बढ़ सकता है। धर्म और संस्कृति के बिना मनुष्य का उत्त्थान संभव नहीं है।
ये दिव्य विचार हैं आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री के, जो उन्होंने मंगलवार को विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के मातृशक्ति प्रकोष्ठ की मेजबानी में चल रही श्रीराम कथा में शिव विवाह प्रसंग की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए व्यक्त किए। न्यास के अध्यक्ष पं. दिनेश शर्मा एवं राजकिशोर शर्मा ने बताया कि कथा शुभारंभ के पूर्व मातृशक्ति प्रकोष्ठ की ओर से मुख्य यजमान श्रीमती पुष्पा-अशोक शर्मा, सरस्वती-दिनेश शर्मा, पिंकी-अखिलेश शर्मा, नीतू-अजय त्रिवेदी, गीता-अजय व्यास, पूनम-विजय शर्मा, सरोज-महेश शर्मा, मीना-प्रमोद जोशी एवं प्रीति –आशीष पंडित ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी स्वाति-विनय शर्मा, भारती-अरविन्द शर्मा, श्रेया-चिराग शर्मा, ज्योति-सुनील खंडेलवाल, साधना-सुरेश शर्मा एवं रश्मि-ओमप्रकाश शर्मा ने की। प्रकोष्ठ की भारती शर्मा एवं पिंकी शर्मा ने बताया कि विद्याधाम परिसर में श्रीराम कथा का यह दिव्य आयोजन 7 जून तक प्रतिदिन शाम 3.30 से 7.30 बजे तक चलेगा। भागवताचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री नेपाल सहित देश के चारों धाम पर भागवत कथा का दिव्य अनुष्ठान कर चुके है।
आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान राम की महिमा का वर्णन कर पाना हमारे लिए संभव नहीं है लेकिन इतना तय है कि रामजी आनंद के सागर हैं और इनके आचरण में सम्पूर्ण निर्दोषता है। देवत्व का भाव वहीं जागृत हो सकता है जहाँ सम्पूर्ण निर्दोषता हो। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी वृत्तियाँ हमारी वास्तविक शत्रु हैं जो हमारे अंतर्मन में घुसकर धर्म, संस्कार और सत्संग जैसी हमारे अनमोल सम्पत्ति को चुरा लेता हैं। जीवन में विनम्रता और दूसरों के सम्मान का भाव राम की तरह और सहजता और सरलता का गुण शिव की तरह होना चाहिए जो केवल जल से ही प्रसन्न हो उठते हैं। राम कथा बुद्धि की सुद्धि का सबसे सहज-सरल उपाय है।
आज 61 मातृशक्ति के संकष्टी चतुर्थी व्रत का उद्यापन – बुधवार 3 जून को पुरुषोत्तम मास की चतुर्थी का व्रत करने वाली 61 माताओं के व्रत का सामूहिक उद्यापन भी होगा। जिनके लिए विद्याधाम परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इस अवसर पर आद्य गौड़ ब्राह्मण सेवा न्यास के सभी पदाधिकारी एवं न्यास से जुड़े सभी प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।
