
इंदौर
रिश्ते बनते मुश्किल से हैं लेकिन बिखरते बहुत सरलता से हैं। वर्तमान में रिश्तों में टूटन और बिखराव का दौर कुछ ज्यादा ही चल रहा है, चाहे पति-पत्नी का रिश्ता हो या माँ बेटी का, बेटी-बेटे का हो या भाई-बहन का अथवा सखियों या प्रेमी युगल का। रिश्तों को सहेजने और सँवारने की कोई कोचिंग या ट्रेनिंग नहीं होती लेकिन यदि परिवार के बुजुर्गों, माता-पिता और समाज के वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन मिलता रहे तो रिश्तों को दरकने से बचाया जा सकता है।
यह निष्कर्ष है महिला प्रकोष्ठ अग्रवाल समाज द्वारा मल्हार मेगा मॉल एबी रोड पर आयोजित परिचर्चा का, जिसमें शामिल 100 से अधिक सखियों ने रिश्तों की टूटन, उलझन और बिखराव के सभी आयामों पर खुलकर चर्चा भी की और व्हाट्सअप पर भी अपने विचार साझा किए। सखियों को इस विषय के बारे में पहले से ही अवगत करा दिया गया था। इस चर्चा में प्रकोष्ठ की प्रमुख प्रतिभा मित्तल, मोनिका, गरिमा, शीतल, श्वेता, मोना सहित अनेक सखियों ने बेबाकी से अपने विचार साझा किए। इस चर्चा का निष्कर्ष यही रहा कि रिश्तों को बचाने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की होना चाहिए क्योंकि रिश्तों को तोड़ने और बिखेरने के लिए भी दोनों ही पक्ष जिम्मेदार होते हैं, किसी एक को दोष देना ठीक नहीं है। विवाह के पूर्व और विवाह के बाद के रिश्तों को सहेजने पर भी मंथन हुआ और सखियों ने अपने प्रेरक संस्मरण भी साझा किए। परिचर्चा में शिवांगी, रेणु एवं रीना विजेता रहे जिन्होंने संयुक्त परिवार, खून के रिश्तों और संसार के रिश्तों पर अपनी बात रखी।
प्रारंभ में सखियों ने अनेक मनोरंजक गेम्स एवं तम्बोला का आनंद लिया। डेनिम ड्रेस कोड में सजी-धजी सखियों ने बाद में राजहंस सिनेमा में फिल्म का भी आनंद लिया। लकी ड्रा में वैशाली एवं शोभा विजेता रहे। इसके पूर्व फनी क्वीन स्पर्धा का दिलचस्प आयोजन भी हुआ जिसमें शीतल, श्वेता, मोना ने बाजी मारी जबकि मूवी कांटेस्ट में करुणा और मोनिका विजेता रहे। सभी विजेताओं को आकर्षक उपहार भी दिए गए।
