बाबा रामदेव, एवं महाप्रचंड आश्रम पर यज्ञ-हवन के साथ गूंजी परंपरागत वाद्य यंत्रों एवं भजनों की मंगल ध्वनि

इंदौर माली मोहल्ला, एमओजी लाईन्स स्थित महाप्रचंड हनुमान मंदिर, संतश्री लादूनाथ महाराज गुरू आश्रम पर महंत रामकिशन महाराज के सानिध्य में भादौ सुदी दूज के उपलक्ष्य में बाबा रामदेव के जम्मा जागरण का दिव्य आयोजन अखंड ज्योत, महाआरती एवं राजस्थानी, निमाड़ी और मेवाड़ी भजनों की परंपरागत प्रस्तुतियों के साथ हुआ। सभी भक्तों ने बाबा रामदेव से समूचे अंचल में सुखद वर्षा की कामना की।
जम्मा जगरण में पूरी रात राजस्थान एवं मालवा-निमाड़ के भजन गायक ब्रजमोहन प्रजापत, जगदीश प्रजापत, प्रकाश प्रजापत, सुधीर प्रजापत, सचिन सुईवाल, मयूर सुईवाल एवं सुमित सुईवाल ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तों को पूरे समय मंत्रमुग्ध बनाए रखा। भक्त मंडल के विजय अग्रवाल ने बताया कि आश्रम परिवार के दामोदर सुईवाल, रामचंद्र मंडावरा, रामलाल सावरवाल, सत्यनारायण जाट, जितेन्द्र जैन आदि ने सभी भक्तों और गायकों का स्वागत किया। आश्रम के महंत रामकिशन महाराज के सानिध्य में बाबा रामदेव की अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर आरती के साथ जम्मा जागरण का शुभारंभ हुआ। बाबा रामदेव की प्रसन्नता के लिए हवन का आयोजन भी किया गया। आश्रम के पुजारी योगेश सुईवाल ने पूरी रात बाबा का जम्मा जगाया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
इस अवसर पर परंपरागत अखंड ज्योत की साक्षी में ‘झीनी,झीनी उड़े रे गुलाल….’, ‘खम्मा-खम्मा हो रूणीचे रा धनिया…, ‘अरज सुनो अजमाल जी रामा…’ ‘रामदेवजी मिलिया भुजा प्रसार…’, ‘ रामा मोहे तेरा भरोसा भारी…’, ‘जहाज डूबती तारो रामदेव, जहाज डूबती तारो…’, सुगना बाई करे पुकार…, ‘पीछम घरासू म्हारा पीरजी पधारिया…’, ‘हालो हरजी देवरे…’, ‘थाने तो ध्यावे मारवाड़ अणे आखी गुजरात…’, ‘बाबा आपरी जय बोलां…’, ‘भादुड़ी री दूज रो चंदा करे प्रकास’…एवं ‘राम नाम का खरा खजीना’… ‘रूणिचा में उड़े रे गुलाल…’ जैसे परंपरागत लोकगीतों सहित बाबा रामदेव की आराधना में अनेक भजन प्रस्तुत किए गए। पूरी रात ज्योत जलने तक यह जम्मा जागरण चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। इस मौके पर बाबा रामदेव एवं लादूनाथ महाराज की प्रतिमाओं का आकर्षक पुष्प श्रृंगार तथा आश्रम भवन पर मनोहारी पुष्प एवं विद्युत सज्जा आकर्षण का केन्द्र बनी रही। भजनों के दौरान परंपरागत प्राचीन वाद्य यंत्रों झांज-मंजीरे, ढोलक, सारंगी, हारमोनियम एवं घंटे-घ़ड़ियाल का प्रयोग किया गया।
