
महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में बारह दिवसीय गणेशोत्सव में प्रतिदिन सुबह-शाम पूजन
विद्याधाम पर महागणपति परिवार का 11 हजार
लड्डुओं से सहस्त्रार्चन, 51 विद्वानों ने किया पाठ
इंदौर विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में सोमवार को गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में केशर मिश्रित गौदुग्ध से 101 विद्वान भूदेवों द्वारा गणपति अथर्वशीर्ष के 2100 पाठ कर 11 हजार मोदक एवं लड्डुओं से सहस्त्रार्चन किया गया। श्री विद्याधाम पर रिद्धि-सिद्धि, तुष्टि-पुष्टि, श्री-लाभ, आमोद-प्रमोद एवं गणेशजी की सवारी मूषक सहित गणेशजी का पूरा परिवार विराजित है, जो देश का इकलौता गणेश परिवार मंदिर माना जाता है। बारह दिवसीय गणेशोत्सव में यहां प्रतिदिन सुबह षोडशोपचार पूजन, अभिषेक के साथ गणपति अथर्वशीर्ष के 121 पाठ तथा लड्डु एवं मोदक से सहस्त्रार्चन आराधना होगी। इसकी शुरुआत सोमवार से हो गई।
विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम इंदौर पर प्रथम पूज्य गणेशजी का ऐसा मंदिर स्थापित है, जहां वे अपनी पांच पत्नियों के साथ-साथ दोनों पुत्र और पोतों के साथ विराजित हैं। यह इकलौता ऐसे मंदिर है, जहां पर गणेशजी अपने पूरे परिवार के साथ मौजूद है। मंदिर के न्यासी सुरेश शाहरा, पं. दिनेश शर्मा एवं राजेन्द्र महाजन ने बताया कि इस मंदिर में भगवान गणेश अपनी पांच पत्नियों (ऋद्धि, सिद्धि, तुष्टि, पुष्टि, श्री), दो पुत्रों (लाभ, शुभ) और दो पोतों (आमोद, प्रमोद) के साथ विराजमान है। सोमवार को गणेशोत्सव के पहले दिन यहां के वेदपाठी विद्वानों और न्यासी मंडल के सदस्यों ने महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में इस मंदिर में मोदक का भोग समर्पित कर पूजा अर्चना की। मंदिर पर प्रतिदिन पूरे गणेश परिवार का नित्य नूतन श्रृंगार भी किया जाएगा।
आश्रम परिवार के यदुनंदन माहेश्वरी, रमेश पसारी, सुश्री उमा शर्मा एवं रमेश चंद्र राठौर ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर आचार्य पं. राजेश शर्मा, पं. योगेश पाराशर, आचार्य पं. राहुल कृष्ण शास्त्री एवं अन्य सहयोगी विद्वानों के साथ गणेश मंदिर में केशर मिश्रित गौदुग्ध से अभिषेक किया गया। इस अवसर पर 11 हजार लड्डुओं का भोग भी सहस्त्रार्चन के माध्यम से लगाया गया। दोपहर में 12 बजे जन्मोत्सव आरती भी संपन्न हुई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। गणेशोत्सव में यहां प्रतिदिन सुबह षोडशोपचार पूजन, अभिषेक के साथ गणपति अथर्वशीर्ष के 121 पाठ तथा विभिन्न किस्म के लड्डू एवं मोदक से सहस्त्रार्चन आराधना होगी। संध्या को विशेष श्रृंगार दर्शन, लड्डू एवं मोदक भोग अर्पण के बाद महाआरती भी होगी।
