शहर में पहली बार दलाल बाग पर चल रहे चातुर्मास में आज से दस दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर का अनूठा आयोजन

इंदौर । दूसरों के पुण्य, उनकी प्रतिष्ठा और उनकी सम्पत्ति के सहारे हम अपने जीवन को नहीं संवार सकते। अपना भविष्य हमें अपने पुरुषार्थ और अपनी योग्यता से ही बनाना होगा। प्रतिदिन हमें यह चिंतन करना होगा कि मेरे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है। इसके लिए स्वयं की समझ के साथ माता-पिता और गुरु के मार्गदर्शन को आधार बनाकर अपनी अच्छी बुरी आदतों की सूची तैयार करें और जो भी बुराइयाँ हैं उनके त्याग का संकल्प लें। हमारी दृष्टि बदलना चाहिए, तभी सृष्टि बदलेगी।
संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने मंगलवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में चल रहे चातुर्मास महोत्सव की धर्मसभा में उक्त दिव्य और प्रेरक विचार व्यक्त किए। सभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं पाद प्रक्षालन के साथ हुआ। दलाल बाग पर बुधवार से दस दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर का अनूठा आयोजन शुरू होने जा रहा है इसमें देश-विदेश के करीब दस हजार समाज बंधु शामिल होकर साधु जैसी दिनचर्या बिताएंगे। शहर के इतिहास में इस तरह का आयोजन पहली बार होगा जिसकी व्यापक तैयारियां की गई हैं। समाज बंधुओं की 29 समितियां इस शिविर की तैयारियों को संभालेंगी। धर्मसभा में आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा, महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन, मनीष-सपना गोधा एवं आकाश-दीपिका जैन कोयला आदि ने देशभर से आए साधकों की अगवानी की। इस अवसर पर महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक डोशी, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, प्रदीप बडजात्या, सौरभ बडजात्या, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली सहित अनेक सहयोगी बंधुओं ने विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।
आज से श्रावक संस्कार शिविर – शिविर के प्रमुख पुण्यार्जक चक्रवर्ती आकाश-आलोक जैन कोयला एवं चातुर्मास के चक्रवर्ती मनीष-सपना गोधा, नवीन-शिवानी गोधा, आनंद-अंतिका गोधा एवं सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के महामंत्री हर्ष जैन ने बताया कि पर्यूषण महापर्व के उपलक्ष्य में बुधवार 16 सितम्बर से होने वाले श्रावक संस्कार शिविर में देशभर से साधकों के आगमन का उत्साह देखने को मिल रहा है। शिविर में दस हजार से अधिक साधक देश-विदेश से आकर शामिल होंगे। इसके लिए आज भी साधकों के आगमन का सिलसिला चलता रहा। राष्ट्रसंत ने कहा कि यह दस दिनों का आयोजन जीवन में कुछ असाधारण करने और बनने का अवसर है। जो कार्य सामान्य दिनों में संभव नहीं हो पाता उसे इन दस दिनों की साधना, संयम और संस्कारों के माध्यम से करने का संकल्प लेना ही इस शिविर की सार्थकता होगी।
राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. ने मंगलवार की धर्मसभा में आज से शुरू होने वाले शिविर की महत्ता भी बताई और समाज बंधुओं से आग्रह किया कि वे गुरु से कृपा के अंक नहीं मांगे बल्कि ऐसा आशीर्वाद मांगे कि वे अगली बार अपने पुरुषार्थ से 100 में से 100 अंक ला सकें। उन्होंने कहा कि गुरु का काम केवल शिष्य की हर विपत्ति को दूर करना नहीं बल्कि उसे इतना योग्य बनाना है कि वह स्वयं विपत्तियों का सामना कर सके। गुरु की “ना” में भी उनकी कृपा छिपी होती है क्योंकि वही असफलता और अयोग्यता की पीड़ा व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने की तड़प और लगन पैदा करती है।
मोबाइल, गाड़ी-बंगले और भौतिक सुख-साधनों से दूरी, अनुशासन और संयम का जीवन – शिविर के प्रमुख पुण्यार्जक चक्रवर्ती आकाश-आलोक जैन कोयला एवं चातुर्मास के चक्रवर्ती मनीष-सपना गोधा, नवीन-शिवानी गोधा, आनंद-अंतिका गोधा एवं सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के महामंत्री हर्ष जैन ने बताया कि यह शिविर मात्र धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रावकों के जीवन में संस्कार, संयम, आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की भावना जागृत करने वाला अनूठा आध्यात्मिक प्रयोग है। शिविर के 10 दिनों में शिविरार्थी बाहरी दुनिया की चकाचौंध से दूर रहकर राष्ट्रसंत के मार्गदर्शन में अनुशासित जीवन जिएंगे। शिविर परिसर में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में शिविरार्थी निर्धारित सादगीपूर्ण वेशभूषा में शिविर में ही रहकर संयम, तप, साधना, स्वाध्याय और धार्मिक आराधना करेंगे तथा पर्युषण महापर्व को पूर्ण आध्यात्मिक वातावरण में मनाएंगे। इस दौरान गाड़ी, बंगले और अन्य भौतिक सुख, साधनों से भी इनकी दूरी बनी रहेगी।
शिविर के लिए आचार संहिता – मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने बताया कि इस शिविर में भाग लेने वाले बंधुओं के लिए करीब 30 कड़े नियमों की आचार संहिता प्रभावी रहेगी जिसमें सूर्योदय के पूर्व उठकर 9 बार नमोकार मंत्र पढने, घर में बने आयुर्वेदिक सूखे मंजन का प्रयोग करने, चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं करने, दसों दिन गुटखा, तम्बाकू, सिगरेट बीड़ी आदि का सेवन नहीं करने, बाजार की कोई वस्तु या होटल का खाना-पीना नहीं लेने, दिन में दो बार ही भोजन करने अथवा एकासना करने, दसों दिन दाढ़ी और कटिंग नहीं कराने, प्रतिदिन धोती-दुपट्टा पहनकर पूजन अभिषेक करने, स्नान के समय साबुन की जगह खड़िया मिटटी का प्रयोग करने, बिसलरी एवं नल के पानी का त्याग करने, दसों दिन रेशम, सिल्क के कपडे और चमड़े से बनी वस्तुओं का उपयोग नहीं करने, महिलाओं के लिए लिपस्टिक, नेल पोलिश, पाउडर आदि का उपयोग नहीं करने, दसों दिनों तक किसी की निंदा या आलोचना नहीं करने, प्रतिदिन शाम को प्रतिक्रमण करने, रात्रि में अन्न जल का त्याग करने, अंग्रेजी दवाई का उपयोग नहीं करने जैसे कोई 30 बिंदु दस लक्षण महापर्व के लिए प्रभावशील रहेंगे।
इंदौर में ‘अतिथि देवो भव’ की भावना – 10 हजार से अधिक शिविरार्थियों के आगमन को लेकर इंदौर के जैन समाज में अभूतपूर्व उत्साह और भक्ति का वातावरण है। शिविरार्थियों के लिए इंदौर के जैन परिवारों द्वारा आहार एवं आतिथ्य की व्यवस्था की गई है। समाज के परिवारों में इस बात को लेकर विशेष उत्साह है कि अधिक से अधिक शिविरार्थियों को अपने घर आमंत्रित कर पूर्ण सात्विकता, श्रद्धा और नवधा भक्ति के साथ आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हो। शहर के अनेक परिवार अतिथियों के स्वागत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
