वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग पर आचार्य द्वय प.पू. विश्वरत्न सागर म.सा. एवं मृदुरत्न सागर म.सा. की निश्रा में 5 घंटे चली दीक्षा प्रक्रिया


इंदौर, । शहर के श्वेताम्बर जैन समाज के नाम आज एक और कीर्तिमान जुड़ गया जब वीआईपी रोड स्थित नवरत्न वाटिका, दलाल बाग पर जैन समाज के एक 59 वर्षीय समाजबंधु और २१ वर्षीय युवा का वर्षी दान का वरघोडा कालानी नगर उपाश्रय ने निकलकर पहुंचा, जहाँ धार जिले के रिंगनोद के सुरेश कोठारी अपने संसारी जीवन को त्यागकर ताप और वैराग्य के मार्ग पर चलते हुए साधु बन गए, जबकि दूसरे युवा भानपुरा के कुणाल कमठोरा की दीक्षा विधि रविवार को संपन्न होगी। चातुर्मास की समापन बेला में शहर में विराजित जैनाचार्य युवा हृदय सम्राट प.पू. विश्वरत्न सागर म.सा. एवं आचार्य प.पू. मृदुरत्न सागर म.सा. सहित करीब 60 साधु-साध्वी-भगवंतों की निश्रा में सुरेश कोठारी को मुनि सोहम रत्न सागर का नया नाम मिला है। करीब 5 घंटे चली दीक्षा विधि के दौरान हुई शास्त्रोक्त प्रक्रिया के साक्षी हजारों समाजबंधु बने। इस दौरान बार-बार नवरत्न वाटिका जिन शासन, महावीर स्वामी एवं शांतिनाथ भगवान के जयघोष से गूंजती रही। अक्षत वर्षा के बीच सुरेश कोठारी ने नाचते-गाते हुए जैन साधु के परिवेश में सबका अभिवादन किया। रविवार को यहाँ मुनि उदयरत्न सागर म.सा. को गणि पद प्रदान महोत्सव भी मनाया जाएगा।
अर्बुद गिरिराज जैन श्वेताम्बर तपागच्छ उपाश्रय ट्रस्ट, पीपली बाजार, समग्र जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं जैन श्वेताम्बर मालवा महासंघ के तत्वावधान में यह पहला अवसर था जब एकसाथ दो मुमुक्षुओं का वर्षीदान वरघोडा बैंड-बाजों सहित निकला। दोनों मुमुक्षु बग्घी में सवार होकर अपने संसारी जीवन में काम आने वाली वस्तुओं को लुटाते हुए चले। जुलूस में जैनाचार्य द्वय के अलावा साधु-साध्वी-भगवंतों का समूह भी शामिल था। नाचते-गाते और भजनों पर झूमते हुए 2 हजार से अधिक समाजबंधु इस जुलूस में शामिल होकर दलाल बाग पहुंचे, जहाँ पहले रिंगनोद के 59 वर्षीय सुरेश कोठारी की दीक्षा विधि प्रारंभ हुई। आयोजन समिति की ओर से पुण्यपाल सुराना, कैलाश नाहर, ललित सी. जैन, मनीष सुराना, दिलसुखराज कटारिया, प्रीतेश ओस्तवाल, अंकित मारु, दिलीप मंडोवरा एवं दीपक सुराना आदि ने सभी समाजबंधुओं एवं संतों की अगवानी की। मुमुक्षु सुरेश कोठारी सूट-बूट में सज-धजकर रैम्प पर चलते हुए आचार्यश्री तक पहुंचे और सबको प्रणाम किया। निकट आते ही आचार्यश्री ने उन्हें ओघा और आसन देकर मंत्र पढ़कर सिर पर वासक्षेप की वर्षा कर सुरक्षा कवच प्रदान किया। ओघा लेकर मुमुक्षु ने नृत्य करते हुए समवशरण की परिक्रमा की। इस दौरान महोत्सव के प्रमुख लाभार्थी दिलीप-ललित सी. जैन, प्रीतेश-अनिता ओस्तवाल परिवार एवं अन्य परिवारों ने भी नूतन मुनिराज के कामली, आसन, डांडी, ओघा, संथारा एवं साधु जीवन में काम आने वाली अन्य वस्तुओं की बोली लगाकर पुण्यलाभ उठाया।
चैत्य वन्दन नंदी सूत्र के वाचन एवं सकलश्री की अनुमति के बाद रिश्तेदारों ने अंतिम विजय तिलक लगाकर उन्हें अपना संसारी वेश बदलने के लिए अलग कक्ष में ली जाने की सहमती प्रदान की। करीब ४५ मिनिट बाद मुमुक्षु जब सभागृह में ढोल-धमाकों सहित पहुंचे तो उनका मुंडन हो चुका था और पुराने सूट-बूट की जगह साधु का वेश धारण किए हुए थे। विभिन्न शास्त्रोक्त प्रक्रियाओं के बाद आचार्य श्री ने उन्हें मुनि सोहमरत्न सागर नाम दिया। वे आचार्य विश्वरत्न सागर म.सा. के 14 वे शिष्य होंगे। समारोह में मुंबई, अजमेर, जयपुर एवं मंदसौर-रतलाम सहित देश के विभिन्न शहरों के समाजबंधु बड़ी संख्या में शामिल हुए। गीत और भक्ति संगीत के बीच यह महोत्सव करीब 5 घंटे तक चलता रहा। दीक्षा समारोह में आचार्य विश्वरत्न सागर म.सा., आचार्य मृदुरत्न सागर म.सा., गणिवर्य किर्तिरत्न सागर म.सा., मुनिराज उत्तमरत्न सागर म.सा. एवं उदयरत्न सागर म.सा. सहित बड़ी संख्या में साधु-साध्वी-भगवंतों ने विभिन्न प्रक्रियाओं का पालन कराया। दीक्षा संपन्न होने पर हजारों समाजबंधुओं ने जयघोष के बीच अक्षत वर्षा कर नूतन मुनिराज के प्रति मंगल भाव व्यक्त किए।
नूतन मुनि सोहमरत्न सागर म.सा. मूलतः धार जिले के रिंगनोद के मूलनिवासी हैं। वे 59 वर्ष के हैं और उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो पुत्र, बहन, माताजी और बहुएं, पोते आदि भी शामिल हैं। वे यहाँ दलाल बाग में उपधान तप में शामिल होने आए थे और इस दौरान ही उन्हें संसार से वैराग्य लेने की इच्छा पैदा हुई। उनका एक पुत्र डॉक्टर और दूसरा प्रोफेसर है।
आज एक और दीक्षा होगी – रविवार को दलाल बाग में भानपुरा के २१ वर्षीय युवा कुणाल कमठोरा की दीक्षा विधि संपन्न होगी। सुबह 9 बजे से शुरू होने वाली इस विधि में शनिवार की तरह सभी शास्त्रोक्त विधियों का पालन किया जाएगा। इसके साथ ही रविवार को मुनिराज उदयरत्न सागर म.सा. को गणि पद प्रदान महोत्सव भी आचार्य द्वय की निश्रा में संपन्न होगा। इस मौके पर देशभर से सैकड़ों समाजबधू इंदौर आए हुए हैं।
