50 बग्घियों में सवार होकर निकले 133 तपस्वी, मार्ग में जगह-जगह हुआ स्वागत

इंदौर,। जैनाचार्य, युवा हृदय सम्राट प.पू. विश्वरत्न सागर म.सा. एवं आचार्य प.पू. मृदुरत्न सागर म.सा. की पावन निश्रा में गुरुवार को सुबह पीपली बाजार जैन श्वेताम्बर उपाश्रय से उपधान तप के उन 133 तपस्वियों का वरघोडा बैंड-बाजों एवं परंपरागत वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच निकाला गया, जो पिछले 47 दिनों से दलालबाग पर साधु-साध्वी-भगवंतों की तरह तपस्या कर रहे थे।
अर्बुद गिरिराज जैन श्वेताम्बर तपागच्छ उपाश्रय ट्रस्ट पीपली बाजार, समग्र जैन श्वेतांबर श्री संघ, जैन श्वेताम्बर मालवा महासंघ एवं नवरत्न परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन समिति के संयोजक पुण्यपाल सुराना, कैलाश नाहर, ललित सी. जैन, मनीष सुराना, दिलसुखराज कटारिया, प्रीतेश ओस्तवाल, अंकित मारु, दिलीप मंडोवरा एवं दीपक सुराना ने बताया कि बुधवार से इनकी तपस्या के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय मालारोपण महोत्सव प्रारम्भ हुआ, जिसमें आज इन सभी तपस्वियों को सुसज्जित बग्घियों में विराजित कर दलाल बाग स्थित नवरत्न नगरी तक भव्य जुलूस के रूप में लाया गया। संध्या को सभी तपस्वी एवं लाभार्थी बंधुओं का बहुमान किया गया। मुख्य आयोजन शुक्रवार को सुबह 8 बजे से दलाल बाग के सभा मंडप में होगा, जिसमें मोक्षमाला परिधान एवं आनंद उत्सव के साथ तपस्वियों का स्वर्ण गिन्नी से बहुमान किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से आचार्य श्री प.पू. विश्वरत्न सागर म.सा. अपने इस चातुर्मासिक अनुष्ठान की अंतिम महामांगलिक का अनमोल उपहार दे कर शाम 4 बजे नवरत्न नगरी से आगामी कार्यक्रमों के लिए भावपूर्ण बिदाई लेंगे।
गुरुवार को सुबह पीपली बाजार उपाश्रय से जैसे ही सुसज्जित 50 बग्घियों में देशभर से आए इन तपस्वियों का वरघोडा बैंड-बाजों और वाद्य यंत्रों की भक्ति भावना से भरपूर सुर एवं स्वर लहरियों के बीच खजूरी बाजार की ओर मुड़ा, तपस्वियों की अनुमोदना में उनके परिजन एवं स्नेहीजन थिरक उठे। खजूरी बाजार, गौराकुंड, टोरी कार्नर, बड़ा गणपति, पीलियाखाल, महावीर बाग होते हुए जुलूस दलाल बाग पहुंचा। जगह-जगह साधु-साध्वी एवं तपस्वियों का स्वागत भी हुआ और भगवान महावीर स्वामी, शांतिनाथ दादा एवं जैनाचार्यों के जयघोष तथा तपस्वियों की अनुमोदना के जयघोष होते रहे। आयोजन समिति के सभी प्रमुख पदाधिकारी पूरे समय जुलूस के साथ पैदल चले। नवरत्न नगरी दलाल बाग पहुँचने पर धर्मसभा हुई जिसमें आचार्य प.पू. विश्वरत्न सागर म.सा., गणिवर्य कीर्तिरत्न सागर म.सा., उदयरत्न सागर म.सा. एवं उत्तम रत्न सागर म.सा. ने उपधान तप की महत्ता बताई।
आज स्वर्ण गिन्नी से बहुमान एवं महामांगलिक – आचार्यश्री विश्वरत्न सागर म.सा. के पावन सानिध्य में गत 6 जुलाई से प्रारंभ हुए चातुर्मास अनुष्ठान का विराम 21 नवम्बर को होगा। सुबह दलाल बाग पर 7.30 बजे से नवकारसी के बाद 8 बजे से मोक्षमाला परिधान, आनंद उत्सव में तपस्वियों का स्वर्ण गिन्नी से शाही बहुमान होगा। उपधान तप के मुख्य लाभार्थी दिलसुखराज कटारिया, सह लाभार्थी विनोद कुमार रतनलाल जैन परिवार तथा बहुमान के लाभार्थी सतीश-अमन व्होरा परिवार होंगे। दोपहर 12 बजे से पाप-ताप-संताप को दूर करने वाली चमत्कारिक महामांगलिक का अनमोल उपहार दे कर आचार्यश्री शाम 4 बजे नवरत्न नगरी से आगामी कार्यक्रमों के लिए भावपूर्ण बिदाई लेंगे।
