
इंदौर । किसी भी राष्ट्र की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब हम अपनी मूल संस्कृति और संस्कारों को जीवित रखने का सार्थक पुरुषार्थ करें। समाज को नैतिक और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने के लिए शिव महापुराण और भागवत तथा रामचरितमानस जैसे धर्म ग्रंथों पर आधारित अनुष्ठान नियमित रूप से होना चाहिए। आज समाज की नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़कर उन्हें एक संस्कारित राष्ट्र के निर्माता के रूप में प्रतिष्ठित करने की जरूरत है।
ये दिव्य विचार हैं इंदौर के भागवताचार्य पं. आयुष्य दाधीच के, जो उन्होंने दक्षिण भारत के श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग पर गत 16 दिसम्बर से चल रहे शिव महापुराण कथा सत्संग के अनूठे आयोजन में उपस्थित इंदौर एवं मालवांचल के लगभग 200 श्रद्धालुओं को कथा समापन पर राष्ट्र एवं धर्म-संस्कृति की सेवा का संकल्प दिलाते हुए व्यक्त किए। गत 16 दिसम्बर से श्रीशैलम में हरिहर सेवा मंडल की मेजबानी में शिवपुराण कथा सत्संग का यह दिव्य अनुष्ठान चल रहा था जिसकी पूर्णाहुति सोमवार को संपन्न हुई। इस दौरान इंदौर एवं मालवांचल से आए भक्तों ने दक्षिण भारत के श्रीशैलम के आसपास के स्थानों की भी यात्रा की और देव दर्शन के साथ देश दर्शन की कहावत को भी चरितार्थ किया।
हरिहर सेवा मंडल से जुड़े इंदौर के महेश मुकाती, मुकेश पाटीदार, भरत पाटीदार एवं चित्तौड़ा महाजन समाज के विमल हेतावल ने बताया कि मंडल द्वारा अब तक देश के 9 तीर्थस्थलों पर भागवत, राम कथा एवं शिव पुराण सहित विभिन्न सत्संग संपन्न हो चुके है। इसकी शुरुआत वर्ष 2019 में द्वारका धाम से हुई। 2020 में जगन्नाथ पुरी, 2022 में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या और रामेश्वरम, 2023 में पशुपतिनाथ (नेपाल), 2023 में ही काशी विश्वनाथ, 2024 में बद्रीनाथ धाम एवं वृन्दावन धाम तथा इसी वर्ष 2025 में माँ कामख्या धाम (गुवाहाटी) में सम्पन्न हो चुके हैं। अब अगले चरण में वर्ष 2026 में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भी समाज सेवी रामचंद्र सैनी परिवार के सहयोग से श्रीराम कथा का दिव्य आयोजन भी होने जा रहा है और उसकी भी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।श्री शैलम में शिव पुराण के समापन के साथ ही सोमवार को सभी श्रद्धालुओं ने हैदराबाद पहुंचकर वहां से दक्षिण सुपरफ़ास्ट ट्रेन से बुरहानपुर होते हुए मंगलवार की रात्रि में इंदौर आने का निश्चय किया है।
