हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञकुंडों की अग्नि और देवताओं की साक्षी में लिया बच्चों
को लव जिहाद से सजग करने और धर्मयुद्ध में लिप्त लोगों की मदद का संकल्प
पूर्णाहुति पर 40 हजार भक्तों के लिए बनेगा महाप्रसाद, 35 संतों का आगमन

इंदौर । बंगाली चौराहा स्थित मैदान पर चल रहे विराट लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में शामिल यजमान युगलों सहित हजारों भक्तों ने मंगलवार को यज्ञ कुंडों की अग्नि और लक्ष्मीनारायण सहित यज्ञ में आहूतियां दी। भक्तों ने लव जिहाद की बढ़ती दुष्प्रवृत्ति से अपने बच्चों को सजग करने और धर्म युद्ध में लिप्त योद्धाओं के परिवारों की हरसंभव मदद करने जैसे संकल्प भी लिए।
आयोजन समिति के देवव्रत पाटीदार एवं अलकेश सुलिया ने बताया कि पंचमुखी धाम आगरोद के अधिष्ठाता महंत कृष्णगोपाल दास महाराज के सानिध्य एवं काशी से आए यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे के निर्देशन में 15 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक श्रीसूक्त एवं पुरुषसूक्त से करीब 13 लाख आहुतियाँ संपन्न हो चुकी हैं। पिछले 6 दिनों में यहाँ लगभग एक लाख श्रद्धालु यज्ञ शाला की परिक्रमा का पुण्य लाभ उठा चुके हैं। बुधवार को शाम 5 बजे बाद हजारों भक्तों के लिए महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा।
आगरोद स्थित पंचमुखी धाम के अधिष्ठाता महंत कृष्ण गोपाल दास, उदासीन अखाड़े से जुड़े बुरहानपुर के महामंडलेश्वर स्वामी रामदास महाराज, पंचकुईया राम मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी रामगोपाल दास, महानिर्वाणी अखाड़ा वृंदावन के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती, हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत गोविंददास, बद्रीनाथ धाम से महंत गोविन्ददास, वृंदावन से आए मनमोहन दास महाराज, विरक्त साधु समाज मंडल के अध्यक्ष तेरा भाई त्यागी आश्रम के महामंडलेश्वर रामबालक दास रामायणी, निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी केशवदास महाराज, महंत भरतदास महाराज, फौजी बाबा रामकृपाल दास, हरिद्वार के महंत रामदास, महंत रघुनाथ दास, महंत विजय दास, तपोनिष्ठ संत महंत सुखराम दास महाराज एवं काशी से आए यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे सहित लगभग 35 संतों-महंतों के सानिध्य में हुई महाआरती के बाद धर्म सभा में यजमान युगलों सहित यज्ञ स्थल पर मौजूद भक्तों ने अनेक संकल्प व्यक्त किए।
परिक्रमा करने वालों का मेला जुटा – लक्ष्मीनारायण महायज्ञ शाला की परिक्रमा करने के लिए मंगलवार को भी 15 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, इनमें सैकड़ों स्कूली बालक-बालिकाएं भी शामिल हुए। परिक्रमा का यह क्रम सुबह 4 बजे से लगातार चल रहा है। दोपहर 12 से 2 बजे के बीच परिक्रमा स्थल पर पैर रखने की जगह भी बड़ी मुश्किल से मिल पा रही है। बुधवार को समापन दिवस पर यहाँ 40 हजार भक्तों के आगमन और परिक्रमा करने का अनुमान है।
आज 40 हजार भक्तों के लिए दाल और चावल की खिचड़ी सहित बनेगा महाप्रसाद – महायज्ञ में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालु अपने साथ मूंग की दाल और चावल लेकर आ रहे हैं। अब तक यहाँ करीब 15 क्विंटल दाल चावल का संग्रह जमा हो चुका है। बुधवार को मकर संक्रांति पर चावल दान करने की परंपरा को देखते हुए सैकड़ों भक्त और अधिक दाल चावल का दान करेंगे। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात यहाँ 20 क्विंटल दाल चावल से खिचड़ी प्रसाद के साथ ही 20 क्विंटल आटे, 25 क्विंटल रामभाजी, 25 क्विंटल आलू और नुक्ती तथा मिठाई प्रसाद का निर्माण होगा। यह प्रसाद आज रात से ही बनाना शुरू हो गया है। करीब 40 हजार भक्तों के लिए यहाँ शाम 5 बजे से महाप्रसादी का क्रम प्रारंभ होगा, जिसमें परोसगारी एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
