
राष्ट्रसंत ने रची नई ईबारत, दक्षिण भारत के भट्टारक लक्ष्मीसेन म.सा. को
भेंट की पिच्छी, हुआ जैन समाज की दो धाराओं का ऐतिहासिक संगम
इंदौर संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने गुरुवार को जैन समाज के इतिहास में एक नई ईबारत लिख डाली जब उन्होंने दक्षिण भारत में विराजमान भट्टारक लक्ष्मीसेन महाराज को पिच्छी प्रदान की। यह जैन समाज की दो धाराओं के ऐतिहासिक संगम का साक्षी दृश्य था और इस अवसर पर जैन इंटरनेशनल एकता आर्गेनाईजेशन के अंशुल जैन शास्त्री एवं अरिहंत शास्त्री सहित इंदौर समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति की ओर से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा, महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन, मनीष-सपना गोधा एवं आकाश-दीपिका जैन कोयला ने बताया कि यह केवल नवीन पिच्छी प्रदान करने का प्रसंग नहीं बल्कि सम्मान, समन्वय और जैन एकता का भी अनुपम सन्देश है। दिगम्बर मुनि परम्परा और भट्टारक परम्परा ने अपने-अपने समय में जिन वाणी, जैन संस्कृति और धर्म संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के इस ऐतिहासिक दृश्य से पूरे समाज को यह सन्देश भी मिला है कि परम्पराएँ अलग हो सकती हैं लेकिन हमारी आस्था, जिन वाणी, जैन धर्म और सांस्कृतिक विरासत एक ही है। इस अवसर पर ऐलक 105 सुबोध सागर म.सा. सहित अनेक संत एवं जैन इंटरनेशनल एकता आर्गेनाईजेशन के सदस्यों की भी गरिमामय उपस्थिति रही।
मीडिया प्रभारी राहुल सेठी में बताया कि इस अवसर पर संजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या, विजय पाटोदी, साधना दगडे सहित अनेक गणमान्य बंधु उपस्थित थे जिन्होंने इस प्रसंग पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुनि परम्परा और भट्टारक परम्परा, दोनों ही हमारी है। ये दोनों हमारी गौरवशाली विरासत है। इन सबसे ऊपर बड़ी बात यह है कि जैन धर्म हम सबका है। आज केवल पिच्छी प्रदान नहीं हुई बल्कि परस्पर सम्मान, समन्वय और जैन एकता की एक नई किरण भी दिखाई दे रही है। आने वाली पीढ़ियों को यह प्रसंग एकता और हमारी गौरवशाली धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की प्रेरणा देता रहेगा।
नियमित प्रवचन जारी – सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप पर चातुर्मास महोत्सव की श्रृंखला में नियमित धर्मसभा में राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा. के प्रवचनों की अमृत वर्षा का क्रम प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक जारी है। चातुर्मास के दौरान 15 सितम्बर से श्रावक संस्कार शिविर का दिव्य आयोजन भी होने जा रहा है। इसमें देशभर के समाज बंधु इंदौर आकर शामिल होंगे और 10 दिनों तक शिविर में वहां की दिनचर्या के अनुसार पालन करेंगे। इसकी व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
