खजराना गणेश मंदिर परिसर में सप्तऋषि भागवत मंडल की मेजबानी में चल रहे ज्ञान यज्ञ में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

इंदौर हमारी सनातनी और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाते हैं हमारे तीज-त्यौहार। दुनिया के किसी अन्य देश में इतने उत्सव नहीं मनाए जाते जितने हमारे यहाँ मनते हैं। हमारी संस्कृति में उत्सवों के अनेक रंग भरे हुए हैं। जन मानस को उत्साह और उमंग से भरने का यह जज्बा ही उत्सव कहलाता है। यहाँ तक कि विदेशों के लोग भी सात समन्दर पार से हमारे यहाँ आकर इन उत्सवों का आनंद लेते हैं। भगवान अवतार लेते हैं, उनका जन्म नहीं होता। भारत अवतारों की ही पुण्य भूमि है। याद रखें कि भगवान दुष्टों के नाश और सज्जनों के संरक्षण के लिए ही पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। राम और कृष्ण के बिना सनातन संस्कृति न तो समृद्ध हो सकती है और न ही परिपूर्ण। यह शाश्वत संस्कृति ही भारतीय समाज की प्राण वायु है।
ये दिव्य विचार हैं भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के, जो उन्होंने सप्तऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में बुधवार की शाम को खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान व्यक्त किए। कथा में भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पहले राम जन्म, फिर कृष्ण जन्म के उत्सव का उल्लास तो इतना जबरदस्त था कि समूचा सभागृह भजनों पर नाच उठा। माखन-मिश्री की वर्षा और नंद में आनंद भयो से लेकर अनेक भजनों पर श्रद्धालु थिरकते रहे। कथा शुभारम्भ के पूर्व मनोरथी समूह की ओर से अशोक-आरती खंडेलवाल, महेंद्र-दिव्या मानधन्या, रामचंद्र-उषा पितलिया आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, आशीष-खनक शर्मा एवं स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल ने की। कथा प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक हो रही है।
आज गोवर्धन पूजा – सप्त ऋषि भागवत मंडल के अशोक खंडेलवाल ने बताया कि कथा में गुरुवार 21 मई को महिला-पुरुष हरे रंग के ड्रेस कोड में आएंगे तथा गोवर्धन पूजा उत्सव में शामिल होंगे। शुक्रवार 22 मई को रुक्मणी विवाह का उत्सव मनाया जाएगा जिसमें पुरुष एवं महिलाएं अपनी पसंद के परिधान में सज-धजकर शामिल होंगे। समापन दिवस पर 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं कथा विश्राम के प्रसंग में श्रद्धालु लाल रंग के परिधान में भागीदार बनेंगे। कथा स्थल पर मौसम को देखते हुए भक्तों की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं। भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी पूर्व में दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, मलेशिया, वियतनाम तथा देश के लगभग सभी तीर्थस्थलों पर भागवत कथा एवं सनातन धर्म की पताका फहरा चुके हैं।
पं. तिवारी ने कथा के दौरान कहा कि देवता और राक्षसों के बीच संघर्ष आदि अनादी काल से चल रहा है। आज भी समाज में आतंकियों और राष्ट्रद्रोही तत्वों की शक्ल में राक्षसी प्रवृत्तियां मौजूद हैं लेकिन हमें इनसे डरने की नहीं बल्कि संगठित होकर इनका मुकाबला करने की जरूरत है। भगवान ने स्वयं कहा है कि जब-जब पाप बढेगा, मैं स्वयं अवतार लूँगा। आज भी हमें ऐसे अनेक प्रसंग सुनाई देते हैं जहाँ लगता है कि यह तो भगवान के अनुग्रह के बिना संभव ही नहीं है। भगवान की लीलाएँ कभी बंद नहीं होती। आज हम यहाँ जो उत्सव मना रहे हैं, वह हमारे पिछले जन्मों की पुण्याई और प्रारब्ध का ही फल है। शुभ संकल्पों में वही लोग शामिल हो पाते हैं, जिन्हें स्वयं भगवान बुलाते हैं।
