अम्बिकापुरी स्थित खाटू श्याम धाम पर चल रहे श्याम महायज्ञ में कल देंगे निर्जला एकादशी पर 108 श्रीफलों से आहुतियाँ – करेंगे सुखद वर्षा की कामना

इन्दौर
खाटू वाले श्याम बाबा की हर बात निराली है। दुनिया में लोग ताकत, पैसा और ऐश्वर्य देखकर अपने रिश्ते बनाते हैं लेकिन खाटू वाले श्याम बाबा तो हारे हुए लोगों की मदद के जरिए अपने रिश्ते बनाते हैं। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धरों में श्याम बाबा की गिनती होती है। भगवान की नजरों से हमारा कोई भी कर्म बच नहीं सकता और बिना कर्मफल से बचे कोई रह नही सकता। बर्बरीक ऐसे ही अवतारी देव हैं जिन्हें खुद भगवान कृष्ण ने देवत्व प्रदान किया है।
ये दिव्य विचार हैं दिल्ली के प्रख्यात भागवताचार्य पं. संजय प्रभाकर के, जो उन्होंने मंगलवार को एयरपोर्ट रोड, अंबिकापुरी स्थित श्री खाटू श्याम धाम मंदिर के 29वें वार्षिकोत्सव में चल रही श्याम भागवत के दौरान व्यक्त किए। महामंडलेश्वर स्वामी गोपालदास महाराज के सानिध्य में अ.भा. खाटू श्याम अखाड़े के अनेक संत-विद्वान इस महोत्सव में शामिल होने आए हुए हैं। कथा में पं. संजय प्रभाकर ने स्कन्द पुराण के अनुसार नवधा भक्ति एवं शबरी की कथा भी सुनाई और कथा प्रसंग के अनुसार मंदिर परिसर में ध्वजा यात्रा भी निकाली गई। कथा शुभारंभ के पूर्व व्यास पीठ का पूजन समाजसेवी विष्णु बिंदल, मनीष गुप्ता, ओमप्रकाश अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, पवन शर्मा, दीपक शर्मा, विनोद मित्तल, मनोज सालवी, महेश किरार, विनोद विश्वकर्मा, राहुल प्रजापत, गणेश शर्मा ने किया। विद्वान वक्ता की अगवानी मुस्कान शर्मा, पूजा खंडेलवाल, ममता सोनी, मीना सोनी, संतोष ठाकुर, पिंकी ललित चावड़ा, संतोष कुमावत, संतोष शास्त्री, हर्ष शर्मा, सुनीता शर्मा, सविता शर्मा ने की।
महंत नीलू बाबा ने बताया कि दिल्ली से आए भागवताचार्य पं. संजय प्रभाकर के श्रीमुख से खाटू श्याम भागवत के आयोजन में दिनोंदिन भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। सुबह 8 से 10 बजे तक खाटू श्याम महायज्ञ भी पूरे उत्साह एवं उल्लास के साथ चल रहा है। अ.भा. खाटू श्याम अखाड़े के अनेक संत-महंत भाग लेने आए हुए हैं। कथा का समापन बुधवार 24 जून को कुरुक्षेत्र में बर्बरीक के शक्ति प्रदर्शन, श्रीकृष्ण द्वारा शीश छेदन, मस्तक पर अमृत सींचन, बर्बरीक के पुनर्जन्म, वरदान एवं बर्बरीक स्तुति जैसे प्रसंगों की कथा के साथ दोपहर 3 से 6 बजे तक होगा।
पं. प्रभाकर ने खाटू श्याम धाम में मंगलवार को पांडवों के वनवास, दादा-पोते के बीच युद्ध, भीमेश्वर महादेव तथा भीमसेन-देवी संवाद जैसे प्रसंगों की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए कहा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भीम के पौत्र बर्बरीक की शक्ति को देखा-परखा, और उनके बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में तुम्हारी पूजा भी मेरी तरह होगी। हारे का सहारा और शीश के दानी के रूप में श्याम बाबा के भक्तों की संख्या हर दिन कई गुना रफ़्तार से बढ़ रही है।
