हमारे हाथ की लकीरें बदलने की ताकत हमारे ही पसीने में – दलाल बाग में चल रहे चातुर्मास की धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन

इंदौर धर्म केवल उदाहरण के लिए नहीं करना चाहिए। यह याद रखें कि किस्मत को बदलने के लिए धर्म ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है। स्वार्थ और लोभ से किया गया धर्म फलीभूत नहीं, व्यर्थ ही रहेगा। हमारे पूर्व में बांधे हुए कर्म कोई बुरे फल नहीं दे पाएं, उन्हें रोकने के लिए ही धर्म का आश्रय लिया जाता है। किस्मत में जो मिला है उसमें अपना पसीना भी मिलाना चाहिए। हमारे पसीने में वो ताकत है जो हमारे हाथ की लकीर तक बदल सकती है। मोक्ष मार्ग किस्मत से नहीं मिलता। किस्मतवाला कभी न तो धर्म कर सकता है और न ही धर्मात्मा बन सकता है।
ये दिव्य एवं प्रेरक विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने मंगलवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास की महती धर्मसभा में उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए। प्रारम्भ में झांझरी परिवार अगरबत्ती वाले ने पाद प्रक्षालन का लाभ लिया। अशोक डोसी एवं सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा ने राष्ट्रसंत को श्रीफल अर्पित किए। मंगलाचरण काजल जैन ने किया। संचालन मुक्ता जैन और सोनाली जैन ने किया। आभार माना दिगम्बर जैन सामाजिक संसद के महामंत्री हर्ष जैन ने। आयोजन समिति की ओर से नवीन गोधा, मनीष गोधा, अशोक डोसी, हर्ष जैन, आकाश जैन कोयला आदि ने देशभर से आए सभी साधकों की अगवानी की। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा जारी है। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
दलाल बाग पर तिरंगा यात्रा – स्वतन्त्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर शनिवार 15 अगस्त को सुबह 7 बजे श्रीआदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर छत्रपति नगर से दलाल बाग स्थित विद्या-सुधा मंडप तक राष्ट्रसंत प.पू. विद्यासागर महाराज के सानिध्य में निकाली जाएगी। सुबह 7.30 बजे ध्वजा रोहण होगा। इसके पूर्व 14 अगस्त को रात 8 बजे से “एक शाम देश के नाम” आयोजन में राष्ट्रभक्ति का शानदार जज्बा और जलवा देखने को मिलेगा।
राष्ट्रसंत ने सुबह महती धर्मसभा में कहा कि कई बार शब्दों के अर्थ क्षेत्र के हिसाब से बदलते रहते हैं। हमें तो यह भी नहीं मालूम कि हम जन्म से पहले थे भी या नहीं। इस छोटे से ज्ञान से जिन्दगी चलने वाली नहीं है। जो ज्ञान और धन किस्मत से मिलता है, उससे काम नहीं चलेगा। वसीयत से भी जीवन नहीं चल पाएगा। किस्मत से मिले ज्ञान और धन के भरोसे पूरी जिन्दगी नहीं निकाली जा सकती। केवल किस्मत के भरोसे नहीं रहना चाहिए। राजकुमार होना बहुत आसान है लेकिन राजा बनना कठिन है। जरुरी नहीं कि राजकुमार ही राजा बनेगा। भगवान राम रातोंरात राजा बनने की जगह वनवास पर चले गए। यदि हमारे मन में यह विचार आए कि मैं तो मेरी किस्मत का खा रहा हूँ तो वहां धर्म खत्म हो जाएगा। किस्मत को बदलने वाले लोग ही धर्म को अपना मान सकते हैं।
राष्ट्रसंत ने सभा में उपस्थित समाज बंधुओं से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के मोबाइल पर भी ध्यान रखें कि वे किस तरह के चित्र और कार्यक्रम देख रहे हैं। जिस तरह किसी घर का परिचय वहां दीवार पर लगे चित्रों से मिल जाता है और नियत एवं चरित्र का पता चल जाता है, उसी तरह अपने बच्चों के मोबाइल से भी अंदाज लग सकता है कि वह किस तरह उपयोग कर रहा है। इससे बच्चे के चरित्र का पता लग जाएगा। जिनवाणी अपने भक्त की किस्मत बदल देगी, इसी विश्वास के साथ मैं यहाँ प्रवचन दे रहा हूँ। भगवान के अभिषेक से भक्त की किस्मत बदल जाती है। शांतिधारा से अशुभ कर्म दूर होते हैं और किस्मत भी बदल जाएगी इसीलिए कह रहा हूँ कि देव दर्शन करो, अभिषेक करो क्योंकि किस्मत को बदलने का यही उपाय है। जिनेन्द्र भगवान के दर्शन और अभिषेक में हमारी किस्मत बदलने की क्षमता है। कभी केवल भगवान भरोसे मत रहना, भगवान मात्र देखने वाले हैं। पूर्वजों की वसीयत के भरोसे भी मत रहना। गुरु के आशीर्वाद के भरोसे भी अपनी गाड़ी मत छोड़ देना लेकिन गुरु को नमस्तु करके जाओ फिर गाड़ी छोड़ दो तो बेड़ा पार हो जाएगा।
