जैन मन्दिर छत्रपति नगर से दलाल बाग़ तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा–भारत माता की जय और वन्दे मातरम से गूंजता रहा विद्या-सुधा सत्संग मंडप

इंदौर राजतंत्र में राजा का बेटा राजा बनता है, चाहे वह अनपढ़ हो या अयोग्य। हमारे प्रजातंत्र की यही खूबी है कि यहाँ जन्म लेते ही प्रत्येक व्यक्ति को बड़े से बड़े पद तक पहुँचने के अवसर मिलते हैं। सही आज़ादी वही है जहाँ किसी व्यक्ति को कहीं भी आने-जान की स्वतंत्रता हो, रहने की आज़ादी हो और सीमाओं का बंधन नहीं हो। हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना वाले लोग हैं इसलिए आजादी के इस मौके पर यही चाहते हैं कि पूरा विश्व एक परिवार की तरह एक सूत्र में बंधकर रहे। संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह सारे देशों की सीमाएं रेखांकित कर यह सुनिश्चित करे कि कोई भी देश एकदूसरे की सीमा पर बुरी नजर नहीं डाले। जहाँ राजनीति खत्म होती है, वहां से धर्मनीति शुरू होती है। राजनीति मानव के लिए होती है जबकि धर्मनीति मानवता के लिए काम करती है। देश का विभाजन तो एक ही दिन में हो गया था लेकिन अब इसे फिर से जोड़ना बहुत बड़ी चुनौती है। इस पर भी मंथन होना चाहिए।
ये दिव्य और ओजस्वी विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने शनिवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास के दौरान स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में उपस्थित हजारों समाज बंधुओं और शहर के प्रमुख स्कूलों के बच्चों को संबोधित करते हुए राष्ट्र के नाम संदेश में व्यक्त किए। आयोजन समिति के नवीन गोधा, मनीष गोधा एवं हर्ष जैन ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रसंत के सानिध्य में आदिनाथ दिगम्बर जैन छत्रपति नगर से दलाल बाग तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई जिसका संयोजन सचि बडजात्या, शिवानी गोधा, सपना गोधा, अंतिका गोधा, रानी डोसी, तृप्ति जैन सहित अनेक महिलाओं ने किया। दलाल बाग पर समाज के युवक-युवतियों और स्कूली बच्चों ने देशभक्ति से प्रेरित नाटिकाओं के माध्यम से सेना के शौर्य, आतंकवादियों की कायराना हरकतों और देश के लिए बलिदान होने वाले जवानों पर आधारित कार्यकमों का प्रभावी मंचन किया। नाटिकाओं में शामिल बच्चों के साथ राष्ट्रसंत ने आशीर्वाद देते हुए समूह चित्र भी खिंचवाया। राष्ट्रसंत को अशोक डोसी एवं आकाश जैन कोयला ने श्रीफल भेंट किया। शास्त्र भेंट करने का लाभ अर्चना गोधा, दीपिका जैन, मुक्ता जैन एवं सोनाली ने लिया। संचालन नीता जैन ने किया और आभार माना दिगम्बर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा ने। इस दौरान विद्या-सुधा मंडप बार-बार वन्दे मातरम और भारत माता के जयघोष से गुंजायमान बना रहा। देशभक्ति से प्रेरित गीतों की प्रस्तुतियों ने अनेक आँखें नम कर दी। करीब डेढ़ घंटे की इन प्रस्तुतियों के दौरान स्कूली बच्चे तिरंगे लहराते हुए भारत माता की जय और वन्दे मातरम के नारे लगाते रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ वन्दे मातरम और मंगलाचरण के साथ हुआ। बड़ी संख्या में देशभर से आए समाज बंधुओं ने इस जश्न का आनंद लिया।
आशीर्वचन – राष्ट्र संत प.पू. सुधा सागर म.सा. ने कहा कि भाई-भाई के बीच नफरत के बीज फैलाने वाली नीति से किसी का भला नहीं हो सकता। आज़ादी के पूर्व हमारा देश लाखों किमी क्षेत्र में फैला हुआ था। अखंड भारत के रूप में पूरी दुनिया में भारत का नाम था लेकिन देश का विभाजन होता चला गया। राजतंत्र में राजा का बेटा ही राजा बनता है, भले ही वह काबिल हो या न हो लेकिन हमारे प्रजातंत्र की यही खूबी है कि यहाँ प्रत्येक व्यक्ति को जन्म लेने के साथ ही शीर्ष पद तक पहुँचने का अधिकार मिल जाता है। सही आज़ादी वही है जहाँ किसी व्यक्ति को किसी तरह की सीमाओं में नहीं बांधा जाए। देश का विभाजन तो एक ही दिन में हो गया था लेकिन अब इसे फिर से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है। हमारी सीमाओं पर लाखों सैनिक रात-दिन तैनात रहते हैं। अब वर्तमान हालातों में संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह सारे देशों की सीमाओं को रेखांकित करे और यह सुनिश्चित कर दे कि कोई भी देश एकदूसरे की सीमा पर बुरी नजर नहीं डाले और किसी तरह का कब्जा नहीं करे। दुनियाभर में जो झगड़े चल रहे हैं वे इसी कारण चल रहे हैं। हम श्रीराम के देश के लोग हैं और कोई बुरी नजर डालेगा तो जिस तरह रावण को लंका में घुसकर मारा था, उसी तरह उन दुश्मनों को भी मारने में पीछे नहीं हटेंगे, जो हमारी सीमाओं पर या हमारी सम्पत्ति पर बुरी नजर डालेंगे। यदि संयुक्त राष्ट्र संघ ऐसी पहल करे तो किसी माँ का बेटा, किसी पत्नी का पति, किसी बहन का भाई शहीद नहीं होगा और हर रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाईयों पर रक्षा सूत्र बांध सकेगी।
