
आचार्यश्री सुनील सागर म.सा. का आह्वान – मांस के व्यापार को बंद करने और गौहत्या पर रोक लगाने के लिए समाज जागरूक बनें
इंदौर स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जैनाचार्य श्री सुनील सागर म.सा. के सानिध्य में हजारों राष्ट्र प्रेमी नागरिकों के साथ रामशाह मंदिर से राजवाड़ा तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। शहर के इतिहास में पहली बार आचार्य सुनील सागर म.सा. एवं उनके साथ इंदौर में चातुर्मास के लिए नेमी नगर जैन कॉलोनी में विराजित संतों एवं मुनियों के साथ राजवाड़ा पर ध्वजा रोहण, राष्ट्रगान एवं मंगलाचरण के साथ इस कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आचार्यश्री ने आम नागरिकों से आग्रह किया कि वे देश की स्वतंत्रता के साथ स्वयं को अपने विकारों से भी स्वतंत्र बनाएं। देश को अहिंसा और जीवदया का सन्देश देते हुए आचार्यश्री ने मांस के व्यापार को बंद करने तथा गौहत्या पर रोक लगाने की दिशा में समाज को जागरूक होने का भी आह्वान किया।
नेमी नगर जैन कॉलोनी से टोरी कॉर्नर होते हुए रामशाह मंदिर से राजवाड़ा तक हजारों समाज बंधुओं सहित तिरंगा यात्रा निकाली गई। सुरेनरद् जैन बाकलीवाल एवं महावीर जैन ने बताया कि यात्रा के दौरान जगह-जगह आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन किए गए। रत्नत्रय ग्रुप के जितेन्द्र जैन तथा श्रीजी अभिषेक ग्रुप के निलेश सेठी एवं साथियों ने मार्ग में सभी व्यवस्थाएं संभाली। रामशाह मंदिर से संदीप पहाड़िया, सुधीर गोधा, पवन पाटौदी एवं दीपक पाटनी ने यात्रा के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के रूप में सजे बच्चों की व्यवस्थाएं संभाली। राजवाड़ा पहुँचने पर समाज के प्रमुख अशोक बडजात्या, मनीष-सपना गोधा, सावन पहाड़िया, संदीप जैन मोयरा एवं धीरेन्द्र कासलीवाल ने आचार्यश्री के सानिध्य में ध्वजारोहण किया। पाद प्रक्षालन का लाभ मनीष-सविता जैन कल्पतरु ने लिया। आचार्यश्री को अनिल जैन जेनको, प्रमोद पापड़ीवाल परिवार ने शास्त्र भेंट किया। अतिथियों का स्वागत सुरेन्द्र जैन बाकलीवाल, डीके जैन, विपिन गंगवाल एवं महावीर बैनाडा ने किया। जन-गण-मन का उद्घोष प्रख्यात गायक चिंतन बाकीवाला, आयुषी बाकलीवाल, स्मिता गंगवाल, अर्पिता पटौदी एवं मेघना जैन ने किया। वन्दे मातरम एवं मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। संचालन जिनेश झांजरी एवं अनामिका बाकलीवाल ने किया। आभार माना वीरेन्द्र बडजात्या एवं आतिश जैन ने।
इस अवसर पर इंदौर जैन समाज की ओर से राजकुमार पाटौदी, कैलाश वैद, देवेन्द्र सोगानी, सौरभ पाटौदी, आरके जैन रानेका, धर्मेद्र जैन सिनकेम, गिरीश जैन गिन्नी, प्रदीप शास्त्री, नकुल पाटौदी, राहुल जैन स्पोर्ट्स, पूर्व पार्षद पवन जैन, इन्दर सेठी, कैलाश लुहाडिया, संदीप गंगवाल, सुदीप जैन, सतीश जैन इलाहबाद, मनोज बाकलीवाल, मनोज काला, संजय जैन, हेमंत जैन, एमके जैन सन्मति, तल्लीन बडजात्या, अशोक काला, कमल काला, देवेन्द्र सेठी सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। दोपहर में चातुर्मास के तहत मनोकामना सिद्धि विधान एवं सर्वशांति महायज्ञ का प्रथम दिवस सौल्लास सम्पन्न हुआ जिसमें हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने जोड़े सहित शामिल होकर लाभ लिया। संध्या को श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। आचार्यश्री की मंगलमय आरती के साथ समापन हुआ।
आचार्यश्री के आशीर्वचन – राजवाड़ा पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम में आचार्यश्री ने कहा कि भारत हमारा बड़ा घर है और हमारा घर छोटा भारत है। जिस तरह हम अपने घर की सुरक्षा, स्वच्छता और शान्ति के लिए प्रयास करते हैं उसी तरह देश के लिए भी हमारी भावनाएँ होना चाहिए। राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना युवाओं को समझना चाहिए कि हमने आज़ादी का यह ताज बड़े तप से पाया है। इसके लिए देश ने अनेक वीरों को खोया। आज हम आज़ादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं, इसके पीछे अनेक लोगों का बलिदान हुआ है। जैसे हम यात्रा के दौरान अपने छुटे हुए जूतों को ढूँढने के लिए जिस जूनून के साथ प्रयास करते हैं यदि उतना जूनून हम देश सेवा के लिए दिखाएं तो भारत की तस्वीर बदल सकती है। स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज का भी योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में 100 से अधिक वीरों ने अपने बलिदान दिए है। हमें उन सभी वीरों को याद करना चाहिए जिनके बलिदान से हमें यह आज़ादी प्राप्त हुई है।
आचार्यश्री ने राष्ट्र भक्ति के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए कहा कि हमारे शब्दों में देशप्रेम की मिठास होना चाहिए और जहाँ तक संभव हो अंग्रेजी की जगह हिंदी बोलने का प्रयास करना चाहिए। जैन समाज ने राष्ट्र निर्माण में हमेशा अपना योगदान दिया है। भगवान ऋषभ देव के पुत्र भरत से लेकर भगवान श्रीराम के भाई भरत और दुष्यंत-शकुन्तला के पुत्र भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत रखा गया है। इस देश की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर हमें हमेशा गौरव होना चाहिए।
