दलाल बाग में चल रही चातुर्मास की धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन-कोकिलाबेन हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने भी लिए आशीर्वाद

इंदौर कोल्हू का बैल दिनभर चलता है लेकिन मंजिल पर नहीं पहुँचता। यही स्थिति उस व्यक्ति की भी होती है जो जीवन भर मेहनत तो करता है लेकिन अपने लक्ष्य निश्चित नहीं कर पाता। बार-बार यह सोचना कि “मैंने इतना सब किया लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला”- यह सोच व्यक्ति के पुरुषार्थ को कमजोर बनाता है। इसके बजाय व्यक्ति को स्वयं से पूछना चाहिए कि मैं क्या बन रहा हूँ और मेरी मंजिल के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा क्या है। शरीर की थकान विश्राम से दूर हो सकती है लेकिन मन की हार व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है इसलिए चाहे जैसी परिस्थितियाँ हों, आशा और पुरुषार्थ बनाए रखें।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में चल रहे चातुर्मास महोत्सव की धर्मसभा में व्यक्त किए। सभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं पाद प्रक्षालन के साथ हुआ। कोकिलाबेन हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने भी आज धर्मसभा में उपस्थित होकर मुनिश्री से शुभाशीर्वाद प्राप्त किए। प्रारम्भ में आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा, महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन, मनीष-सपना गोधा एवं आकाश-दीपिका जैन कोयला आदि ने देशभर से आए साधकों की अगवानी की। मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने बताया कि “ये चमक ये दमक, सरकार तुम ही से है” वाले भजन गायक सुधीर व्यास ने भी आज राष्ट्रसंत को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किए और अपना भजन भी सुनाया। इस अवसर पर महोत्सव समिति के हुकमचंद जैन काका, विजय पाटोदी, संजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या, राकेश विनायका, सौरभ बडजात्या, राजेश गंगवाल, डॉ. विशाल जैन, भूपेंद्र भोपाली एवं अन्य सहयोगी बंधुओं ने सभा की व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया। सभा में दिनोंदिन देशभर से आने वाले साधकों का सैलाब उमड़ रहा है। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।
राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. ने कहा कि जीवन में हमारे लक्ष्य, पुरुषार्थ और आत्म निरीक्षण के महत्व समझना आवश्यक है। किसी भी काम की सफलता लक्ष्य तय किए बिना संभव नहीं है। केवल रास्ता जानना ही पर्याप्त नहीं होता, यह भी पता होना चाहिए कि जाना कहाँ है। कोल्हू के बैल की तरह हम दिनभर चलते हैं, शरीर को थकाते हैं लेकिन मंजिल तक नहीं पहुँच पाते। यह स्थिति तभी बनती है जब हम जीवनभर मेहनत करने के बाद भी अपनी मंजिल का लक्ष्य तय नहीं कर पाते। जिन वाणी आत्मा को अजर, अमर, अविनाशी बताती है लेकिन हमारा वर्तमान अनुभव कई बार भय, मोह और इन्द्रिय विषयों से जुड़ा होता है। गुरु के सामने बालक बनकर जाएँगे तो ज्यादा सीखने को मिलेगा। क्रोध आता है तो स्वीकार करें, मोह है तो स्वीकार करें और पाप छोड़ नहीं पा रहे हैं तो कम से कम पाप को पाप कहना सीखें।
