
दलाल बाग स्थित विद्या-सुधा मंडप में देश-विदेश से आए हजारों श्रावकों की मौजूदगी से शहर में बन रहा नया कीर्तिमान
इंदौर जीवन में दोहरे मापदंड नहीं होना चाहिए। हमारे मन, वचन और कर्म में सहजता और सरलता होना चाहिए। अंदर कुछ, और बाहर कुछ और – इस तरह के छल-कपट से मिली सफलता क्षणिक हो सकती है लेकिन वह आत्मा की शांति छीनने वाली होगी। हमें चिंतन करना होगा कि जो व्यवहार हम अपने लिए गलत मानते हैं, वह दूसरे के साथ कैसे सही हो सकता है, हमें भी दूसरों के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उत्तम आर्जव धर्म हमें दोहरे मापदंड छोड़कर सरलता और ईमानदारी का जीवन जीना सिखाता है। ठगी अपने लिए बुरी और दूसरों के लिए अच्छी कैसे हो सकती है, जरुर चिंतन करें।
सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में चल रहे चातुर्मास महोत्सव में पर्युषण महापर्व की धर्मसभा में संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने शुक्रवार को तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए उक्त दिव्य और प्रेरक विचार व्यक्त किए। धर्मसभा में प्रमुख रूप से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, शिविर के पुण्यार्जक आकाश जैन कोयला परिवार, मनीष गोधा आदि ने देशभर से आए 10 हजार से अधिक शिविरार्थियों की आत्मीय अगवानी की। सभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं पाद प्रक्षालन के साथ हुआ। इस अवसर पर महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोसी, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, हुकमचंद जैन काका, प्रदीप ब्रह्मचारी, विनोद भैया, विजय दुर्रा, सौरभ बडजात्या, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली, सोनाली बागडिया एवं अर्चना गोधा सहित अनेक सहयोगी बंधुओं ने विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 9 से 10.30 बजे तक राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।
राष्ट्रसंत ने देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रावकों और गुरु भक्तों को जैन धर्म के दस लक्षणों की व्याख्या बताते हुए कहा कि यदि कोई हमसे 500 रुपए ठगता है तो हम दुखी हो जाते हैं लेकिन जब हम किसी दूसरे को हजारों रुपए से ठगते हैं तो ख़ुशी मनाते हैं। मायाचारी, छल-कपट और बेईमानी पर हमें आत्म चिंतन करना चाहिए कि ठगी अच्छी है या बुरी। ठगे जाओ तो रोना और ठग लो तो खुश होना – यह कैसा न्याय है। दूसरे ने बेईमानी की तो पाप और हमने की तो व्यापार – यह दोहन मापदंड हमें छोड़ना होगा। ठगी चाहे मैं करूँ या कोई दूसरा, सिद्धांत दोनों के लिए एक ही होना चाहिए।
श्रावक संस्कार शिविर में उमड़ा समाज बंधुओं का सैलाब– शिविर के प्रमुख पुण्यार्जक चक्रवर्ती आकाश-आलोक जैन कोयला, चातुर्मास के चक्रवर्ती मनीष-सपना गोधा, नवीन-शिवानी गोधा, आनंद-अंतिका गोधा ने बताया कि पर्यूषण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को भी शिविर में 10 हजार से अधिक समाज बंधुओं की मौजूदगी बनी रही। प्रवचन के दौरान अनेक अवसरों पर राष्ट्रसंत, जिनवाणी एवं जिनशासन के साथ महावीर स्वामी के जयघोष एवं हर्षध्वनि के दृश्य भी देखने, सुनने को मिले। शहर में रहने वाले दिगम्बर जैन परिवारों की ओर से शिविरार्थियों के लिए प्रतिदिन भोजन का आमंत्रण भी दिया जा रहा है जो शहर के इतिहास में पहली बार हो रहा है। बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले श्रावक इंदौर की इस आतिथ्य परम्परा और शिविर की व्यवस्थाओं को देखकर गदगद नजर आ रहे हैं।
