
मप्र वैश्य महासम्मेलन की मेजबानी में 25 प्रमुख समाजों के दो दिवसीय परिचय सम्मेलन में दिखा मिनी कुम्भ मेले जैसा दृश्य
इंदौर मप्र वैश्य महासम्मेलन की मेजबानी में सभी वैश्य समाजों के विवाह योग्य युवक-युवतियों के परिचय सम्मेलन का यह आयोजन सामाजिक एकता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यहाँ आने वाले प्रत्याशियों को अपने भावी जीवनसाथी का चयन करने में आकर्षण से ज्यादा समर्पण की भावना को महत्व देना चाहिए। सच्चा जीवनसाथी ही जीवन के हर मोड पर सुख-दुःख में पूर्ण समर्पण के भाव से हमारा साथ देने वाला हो तो जीवन की नींव और अधिक मजबूत बन सकेगी। पालकों को भी चाहिए कि वे यहाँ से जाने के बाद रिश्ते के बारे में निर्णय लेने में विलम्ब न करें। यहाँ 6 हजार प्रत्याशियों की प्रविष्ठियां प्राप्त हुई हैं। इस स्थिति में अगले परिचय सम्मेलन के लिए आयोजकों को कोई और बड़ा स्थान अभी से देखकर व्यवस्था कर लेना चाहिए।
ये प्रेरक विचार हैं मप्र वैश्य कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल के, जो उन्होंने मप्र वैश्य महासम्मेलन के तत्वावधान में रिंग रोड स्कीम 71 स्थित दस्तूर गार्डन पर आयोजित 25 से अधिक वैश्य समाजों के परिचय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, उद्योगपति विमल तोदी, मनीष शाहरा, नितिन अग्रवाल पाथ (महू), अविनाश अग्रवाल ओएस्टर, बीआर गोयल, पवन सिंघानिया, टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, निर्मल रामरतन अग्रवाल, बंसल खटोड, राजेश चेलावत, दिगम्बर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, मनीष गोधा, श्वेताम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विजय मेहता, बालकिशन छाबछरिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एवं राज्य के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सम्मेलन के समापन अवसर पर देशभर से आए हजारों प्रत्याशी और उनके पालकों तथा रिश्तेदारों की मौजूदगी के कारण समूचा स्थल मिनी कुम्भ मेले की तरह नजर आ रहा था। इस दौरान सबके लिए चाय, स्वल्पाहार, शीतल पेयजल, रियायती भोजन सहित समुचित प्रबंध किए गए थे जिनकी सभी मेहमानों ने खुलकर सराहना की।
प्रारम्भ में आयोजन समिति की ओर से संगठन के प्रदेश महामंत्री अरविन्द बागड़ी, समन्वयक धीरज खंडेलवाल, निपुण गर्ग, संयोजक राजेश गर्ग, शिव जिंदल, सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष दिनेश मित्तल, संगठन के शहर अध्यक्ष अशोक खंडेलवाल, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, जैन समाज के दिलसुखराज कटारिया, विभिन्न वैश्य घटकों के शक्तिनाथ गुप्ता, ईश्वर बाहेती, रामविलास राठी, दिलीप नीमा, शैलेष नागर, सुरेश विजयवर्गीय, नरेन्द्र हेतावल, जगदीश छिरोलिया, हर्ष मेहता आदि की मौजूदगी में अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंत्री तुलसी सिलावट, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, राजेश गर्ग केटी, नितिन अग्रवाल पाथ (महू), निर्मल अग्रवाल, आनंद गोधा, सुदर्शन गुप्ता, मनीष शाहरा, राजेश चेलावत आदि ने अपने विचार व्यक्त किए और इस अभूतपूर्व आयोजन के लिए संगठन के पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं सौंपी। कार्यक्रम का संचालन अरविन्द बागड़ी, नितिन माहेश्वरी, विनोद गोयल आदि ने किया। मुख्य अतिथि गिरीश अग्रवाल ने सम्मेलन स्थल पहुँचते ही वहां लगे सभी प्रमुख वैश्य घटकों के स्टाल्स पर पहुंचकर उनसे इस सम्मेलन एवं उनके समाज की स्थिति के बारे में बातचीत की। उनकी सहजता और सरलता पूरे समय देखने को मिली।
मुख्य अतिथि गिरीश जी ने कहा कि हम सब आज यहाँ एक यज्ञ के हिस्सेदार बन रहे हैं। दाम्पत्य जीवन शुरू होना हमारी संस्कृति में बहुत बड़ी बात मानी जाती है। यहाँ 6 हजार प्रविष्ठियां आई हैं। इनमें से यदि 10 प्रतिशत रिश्ते तय होते हैं तो यह भी एक यज्ञ जैसा ही अनुष्ठान है। विवाह के समय जीवनसाथी के चयन में आकर्षण से ज्यादा समर्पण को देखना चाहिए। जीवन के हर मोड में, हर सुख-दुःख में, पूर्ण समर्पण की भावना रहेगी तो जीवन की नींव और मजबूत बन सकेगी। यहाँ आने वाले पालकों से भी मेरा यही अनुरोध है कि वे यह संकल्प लेकर जाएं कि वे निर्णय लेने में विलम्ब नहीं करें। कोशिश करें कि जल्द से जल्द अपना निर्णय बता दें। जीवनसाथी का श्रेष्ठ चयन हो इसी दृष्टि से परिचय सम्मेलन एक महत्वपूर्ण आयोजन बन गए हैं। आने वाले समय में हमें और अधिक बड़ा स्थान देखना होगा ताकि सभी समाजों के प्रत्याशियों को उचित स्थान मिल सके। गिरीश जी ने सभी आयोजकों, प्रत्याशियों और पालकों को भी बधाई एवं शुभकामनाएं समर्पित की।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि गिरीश जी ने भोजन व्यवस्था में सहयोग देने वाले मेडतवाल, चाय और स्वल्पाहार की व्यवस्था करने वाले महेश खंडेलवाल, परिचय पुस्तिका के सहयोगी गिरीश चौहान सहित अग्रसेन सोशल ग्रुप के सभी सहयोगी बंधुओं को आमंत्रित कर उनका सम्मान भी किया। इस अवसर पर महापौर प्रतिनिधि भरत पारख, जैन समाज के हर्ष जैन, दीपक जैन टीनू, विनोद सिंघानिया, गोविन्द सिंघल, प्रकाश मोमबत्ती, नंदकिशोर कंदोई, सतीश गोयल सहित बड़ी संख्या में सभी वैश्य घटकों के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस बीच परिचय का दौर सुबह 10 बजे से लेकर रात 8 बजे तक चलता रहा। परिचय पुस्तिका के माध्यम से भी अनेक रिश्तों पर चर्चा होती रही।
सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को दस्तूर गार्डन का करीब 1 लाख वर्गफुट वाला मैदान पूरी तरह खचाखच भरा रहा। शाम को तो पैर रखने की जगह मिलना भी मुश्किल हो गई थी। प्रत्याशियों की बड़ी संख्या को देखते हुए परिचय सत्र का शुभारंभ सुबह 10 बजे से ही आयोजन समिति के अध्यक्ष दिनेश मित्तल ने दीप प्रज्वलन कर दिया था। सुबह से शाम तक करीब 440 प्रत्याशियों ने मंच पर पहुंचकर अपने परिचय दिए। इनमें 50 वर्ष आयु के प्रत्याशी को भी जीवनसाथी की तलाश रही तो 26 वर्ष की तलाकशुदा युवती ने भी अपना परिचय दिया। कुछ प्रत्याशी आईआईटी, एमटेक तक उच्च शिक्षित और स्वयं के कारोबार में स्थापित थे तो विदेशों में कार्यरत प्रत्याशी भी सम्मेलन में शामिल हुए। शाम को एक सत्र विधवा, विधुरम तलाकशुदा, परित्यक्त और दिव्यांग जैसी विशिष्ट श्रेणी के प्रत्याशियों के लिए भी आयोजित किया गया जिसमें 80 प्रत्याशी शामिल हुए। कुछ प्रत्याशियों ने सम्मेलन स्थल पर बनाए गए स्टूडियो में बैठकर भी आरजे की मौजूदगी में अपना परिचय दिया। वहीं सम्मेलन की व्यवस्थाओं में अग्रवाल, श्वेताम्बर एवं दिगम्बर जैन, माहेश्वरी, चित्तोड़ा महाजन, खंडेलवाल, विजयवर्गीय, मेडतवाल, मोढ, नीमा, गहोई वैश्य, पोरवाल, गंगराडे सहित सभी प्रमुख वैश्य घटकों के पदाधिकारियों ने दिनरात अपनी सेवाएँ देकर इस सम्मेलन को सार्थक बनाया। श्राद्ध पक्ष होने के कारण तय हुए रिश्तों की मंच से घोषणा नहीं की गई लेकिन आयोजकों के अनुसार करीब 100 रिश्तों पर सहमति होने की सूचना है जबकि 300 से अधिक रिश्तों पर चर्चाओं का दौर चल रहा है।
