हंसदास मठ पर श्रद्धा सुमन सेवा समिति द्वारा आयोजित निशुल्क तर्पण अनुष्ठान में प्रतिदिन सुबह पहुंच रहे सैकड़ों साधक

इंदौर सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति एवं वैदिक परंपरा को समृद्ध बनाने की दिशा में तर्पण जैसे अनुष्ठान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करने का शास्त्रोक्त प्रावधान केवल भारत भूमि पर ही मिलता है, अन्यत्र कहीं नहीं। आज हम छोटे परिवार के नाम पर अपनी वंश परंपरा को सीमित कर बैठे हैं। पहले हम दो-हमारे दो, फिर शेर का बच्चा एक ही अच्छा और अब तो ‘नहीं हो तो भी अच्छा ’ जैसे जुमले चलने लगे हैं, लेकिन याद रखें कि भगवान राम भी चार भाई थे, और हमारे शास्त्रों में भी अष्ट पुत्र की बात कही गई है। माता-पिता हमारे जीवंत देवता है, उनकी सेवा यदि हम जीते जी कर लें तो शायद प्रायश्चित की नौबत ही नहीं आएगी।
ये दिव्य विचार हैं हंसदास मठ के महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के, जो उन्होंने एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ पर आश्रम के महामंडलेश्वर श्रीमहंत रामचरणदास महाराज के सानिध्य में श्रद्धा सुमन सेवा समिति द्वारा आयोजित निःशुल्क तर्पण अनुष्ठान में आए साधकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इसके पूर्व भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने 500 से अधिक साधकों को आज द्वितीया तिथि के लिए तर्पण कराया। उन्होंने बताया कि चतुर्थी और पंचमी का मिश्रित श्राद्ध 30 सितम्बर को हंसदास मठ पर सुबह 8 बजे से होगा।
तर्पण का शुभारंभ भगवान हरि विष्णु के पूजन के साथ हुआ। प्रारंभ में संस्था की ओर से हरि अग्रवाल, राजेंद्र गर्ग, राजेन्द्र सोनी, डॉ. चेतन सेठिया, सूरजसिंह राठौड़, महेंद्र विजयवर्गीय, जगमोहन वर्मा, मुरलीधर धामानी आदि ने वैदिक मंगलाचरण के बीच अतिथियों का स्वागत किया। अनुष्ठान में आज भी 500 से अधिक साधकों ने विधि-विधानपूर्वक अपने-अपने पितरों के प्रति तर्पण क्रिया संपन्न की। पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने कहा कि दो तिथियों का संशय 30 सितम्बर के बाद नहीं रहेगा अर्थात शेष सभी तिथियां क्रमांनुसार 10 अक्टूबर तक चलेंगी। तर्पण के बाद निर्धनों, पशु-पक्षियों के लिए खीर प्रसाद, गौ सेवा, ब्राह्मण सेवा, देव दर्शन आदि की व्यवस्था भी यहां रखी गई है। साधकों से आग्रह किया गत्या है कि वे श्वेत धोती-कुरता या कुरता-पायजामा पहनकर स्नान के बाद सुबह 7.30 बजे तक हंसदास मठ पहुँच जाए, जहाँ आसन से लेकर हर तरह की पूजन सामग्री निशुल्क उपलब्ध है। चमड़े के पर्स, बेल्ट या अन्य सामग्री प्रतिबंधित रहेगी।
सुबह 7.30 बजे तक पहुंचे- समिति के हरि अग्रवाल एवं राजेंद्र सोनी ने बताया कि हंसदास मठ पर श्राद्ध पक्ष में रविवार से 10 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8 से 10 बजे तक तर्पण अनुष्ठान होगा। आम श्रद्धालु यहां आकर निःशुल्क तर्पण कर सकेंगे। तर्पण मे प्रयुक्त सभी सामग्री की व्यवस्था समिति द्वारा की जा रही है। इस दौरान 3 से 9 अक्टूबर तक पितृ मोक्षदायी भागवत कथा भी आचार्य पं. पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के श्रीमुख से प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे तक होगी। इस बार चतुर्थी एवं पंचमी तिथि एक ही दिन 30 सितम्बर को आएगी। कथा में कालूराम–श्यामा पटेल दम्पत्ति मुख्य यजमान मनोनीत किए गए हैं जो स्व. छोगालाल पटेल, मातुश्री स्व. संपत बाई पटेल एवं शुभम पटेल की पावन स्मृति में यह आयोजन करेंगे। जिन परिजनों को अपने पितरों के निधन की तिथि ज्ञात है, वे उस तिथि के दिन हंसदास मठ पहुंच जाएं। जिन्हें अपने पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को शामिल हो सकते हैं।
संलग्न चित्र – हंसदास मठ पर तर्पण अनुष्ठान में शामिल साधक तर्पण क्रिया करते हुए। दूसरे चित्र में भगवान हरि विष्णु की आरती करते महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज एवं भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी।
