हंसदास मठ पर संतों के सानिध्य में पितृ मोक्ष मागवत एवं निशुल्क तर्पण अनुष्ठान- आज मूकबधिर बच्चों के लिए भोजन सेवा
इंदौर

तर्पण और श्राद्ध अपने पूर्वजों एवं पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा और आस्था की अभिव्यक्ति है। श्राद्ध पक्ष में तर्पण की क्रिया एक तरह से पूर्वजों द्वारा सौंपे गए लॉकर की वह चाबी है जिससे हम संस्कारों का खजाना खोल सकते हैं। हमारी नई पीढ़ी को विरासत में संपत्ति के साथ संस्कार भी सौंपना चाहिए। पूर्वजों और पितरों का कर्ज कोई नहीं चुका सकता लेकिन उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
ये दिव्य विचार हैं प्रख्यात भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के, जो उन्होंने रविवार को एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ पर श्रद्धा सुमन सेवा समिति की मेजबानी में दोपहर में आयोजित पितृ मोक्षदायी भागवत ज्ञान यज्ञ में महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य एवं सामाजिक सांस्कृतिक संस्था सेवा सुरभि के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा एवं डॉ. बीडी खंडेलवाल के आतिथ्य में पितृ मोक्ष भागवत के दौरान व्यक्त किए। सुबह तर्पण अनुष्ठान का शुभारंभ भगवान हरि विष्णु के पूजन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत कथा के मुख्य यजमान कालूराम–श्यामा पटेल दम्पत्ति, समिति के हरि अग्रवाल, राजेन्द्र सोनी, राजेन्द्र गर्ग, शंकरलाल वर्मा, महेंद्र विजयवर्गीय, श्रीधर खंडेलवाल, विनय जैन, उमेश गहलोत, आशीष जैन आदि ने किया। मातृशक्ति कीओर से राजकुमारी मिश्रा, सीमा सेन, गीता शर्मा, मंजू सोनी ने आरती में भाग लिया। इसके पूर्व सुबह के सत्र में 700 से अधिक साधकों ने अपने पितरों की पुण्य स्मृति में विधि विधानपूर्वक तर्पण किया। तर्पण के बाद निर्धनों, पशु-पक्षियों के लिए खीर प्रसाद, गौ सेवा, ब्राह्मण सेवा, देव दर्शन का भी साधकों ने पुण्य लाभ उठाया।
आज समिति के संस्थापक मोहनलाल सोनी की श्राद्ध तिथि – समिति के हरि अग्रवाल एवं राजेंद्र गर्ग ने बताया कि सोमवार को सुबह 8 से 10 बजे तक नियमित तर्पण अनुष्ठान के दौरान समिति के संस्थापक मोहनलाल सोनी की श्राद्ध तिथि पर हंसदास मठ के पीठाधीश्वर स्वामी रामचरण दास महाराज का सम्मान किया जाएगा। शाम को 6 बजे स्कीम 71 स्थित मूकबधिर विद्यालय पर दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सेवा होगी। दोपहर में पितृ मोक्ष भागवत दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक जारी रहेगी। यह कथा स्व. छोगालाल पटेल, मातुश्री स्व. संपत बाई पटेल एवं शुभम पटेल की पावन स्मृति में हो रही है। आम श्रद्धालु यहां सुबह आकर निःशुल्क तर्पण कर सकेंगे। तर्पण में प्रयुक्त सभी सामग्री की व्यवस्था समिति द्वारा की जा रही है। जिन परिजनों को अपने पितरों के निधन की तिथि ज्ञात है, वे उस तिथि के दिन हंसदास मठ पहुंच जाएं। जिन्हें अपने पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या पर 10 अक्टूबर को शामिल हो सकते हैं।
