प्रतिदिन भगवती के विभिन्न स्वरूपों का नियमित श्रृंगार, 108 दीपों से महाआरती – रजत मंडित मंडप में विराजित हुई माँ

इंदौर, विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में चल रहे शारदीय नवरात्र महोत्सव में सग्रहमख सहस्त्र चंडी महायज्ञ में 21 विद्वानों के निर्देशन में आहुतियों का क्रम जारी है। महायज्ञ में स्वाहाकार की मंगल ध्वनि से समूचा मंदिर परिसर गुंजायमान बना हुआ है। नवरात्रि के तृतीय दिवस मंगलवार को माँ चंद्रघंटा के रूप में मनोहारी श्रृंगार किया गया। मंदिर के गर्भगृह में माता रानी को 100 किलो चांदी के मंडप में विराजित किया गया है जिनके दर्शनार्थ मंदिर पर भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है।
आश्रम परिवार के सुरेश शाहरा, पं. दिनेश शर्मा, सुश्री उमा शुक्ला एवं राजेन्द्र महाजन ने बताया कि आश्रम पर महासंकल्प, महाध्वज स्थापना, घट स्थापना, पंचाग कर्म एवं मंडल देवता की स्थापना पहले दिन ही हो चुकी है। अब शारदीय नवरात्रि में प्रतिदिन सुबह 7 बजे से वेदपाठ, सुबह 9 से 12 बजे तक सग्रहमख महायज्ञ, दोपहर 2 बजे दुर्गापाठ एवं शतचंडी महायज्ञ, शाम 5 बजे ललिता सहस्त्रनामावली से सहस्त्रार्चन तथा शाम 8.30 बजे महाआरती के आयोजन होंगे। इस 108 दीपों से होने वाली महाआरती में प्रतिदिन 2 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ ले रहे हैं वहीं माँ के नित्य नूतन श्रृंगार दर्शनों का लाभ भी प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु उठा रहे हैं। मंदिर स्थित मां भगवती के सभी स्वरूपों का मनोहारी श्रृंगार भी प्रतिदिन किया जा रहा है।
भगवती के मुख्य मंदिर के समक्ष शिव-पार्वती के प्रतीक बनाकर आकर्षक पुष्प रचना की गई है। प्रतिदिन संध्या को 108 दीपों से भगवती की आरती में भी सैकड़ों श्रद्धालु आकर पुण्य लाभ उठा रहे हैं। महोत्सव में ललिता पंचमी के उपलक्ष्य में 15 अक्टूबर को ललिता सहस्त्र नामावली से माँ को प्रिय व्यंजनों की विशेष आहुतियाँ प्रदान की जाएगी। 20 अक्टूबर को विजया दशमी पर इस महायाग की पूर्णाहुति होगी।
