
भारतीय जनमानस का आदर्श प्रतिबिम्ब है राम कथा – पं. प्रपन्नाचार्य
इंदौर राम कथा से सबसे बड़ी प्रेरणा सत्संग के लिए ही मिलती है। यदि संग श्रेष्ठ हुआ तो जीवन सुधर जाएगा। सत्संग न तो पुरुषार्थ का विषय है, न ही धन और न ही ज्ञान का। सत्संग से मानवत्व और मानवत्व से ही देवत्व का भाव आता है। राम कथा भारतीय जनमानस का आदर्श प्रतिबिम्ब है। राम कथा वह मन्दाकिनी है, जिसका प्रवाह कभी थम नहीं सकता। जन-जन के मन में घर किए बैठी है राम कथा। राम कथा का श्रवण चारों धाम की यात्रा जैसा पुण्य प्रदान करता है।
हवा बंगला, कैट रोड स्थित हरिधाम आश्रम पर शनिवार शाम को श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात कथाकार पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज ने राम कथा के शुभारंभ सत्र में कथा की महिमा बताते हुए उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। आश्रम के अधिष्ठाता महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य में समाजसेवी विष्णु बिंदल, टीकमचंद गर्ग, डॉ. सुरेश चोपड़ा, विजय सिंह राणा, ललित अग्रवाल, संजय अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल आदि ने पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य के साथ आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन महंत घनश्यामदास महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ सात दिवसीय इस ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत ओमप्रकाश अग्रवाल, सीताराम नरेडी, सुधीर मालवीय एवं गुमानसिंह ठाकुर ने किया।
राम कथा की महिमा बताते हुए आचार्य पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि सत्संग के लिए तो देवता भी तरसते हैं। कलियुग में सत्संग को ही भक्ति का सबसे बड़ा और सरल माध्यम बताया गया है। भगवान श्रीराम की कथा एकमात्र ऐसी कथा है जिसमें जीवन के सभी संशयों का समाधान निहित है। भगवान की हर कथा से जीवन का कल्याण तो संभव है लेकिन मानवता प्राप्त करना है तो राम कथा का ही आश्रय लेना पड़ेगा क्योंकि प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे गए हैं जिनका समूचा जीवन चरित्र पूरी तरह निर्दोष माना गया है।
इसके पूर्व आश्रम पर यज्ञाचार्य पं. ललित पाठक के निर्देशन में 51 विद्वानों ने आश्रम परिसर में निर्मित यज्ञशाला में हनुमत महायज्ञ में “कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहीं होइ तात तुम पाहीं” महामंत्र से विश्व शांति, जन कल्याण एवं परिवार, समाज एवं राष्ट्र में सुख, शांति एवं सदभाव की कामना से आहुतियाँ समर्पित की। आश्रम के महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य में अरणि मंथन के साथ जैसे ही अग्नि देवता का प्राकट्य हुआ, यज्ञशाला में स्वाहाकार की मंगल ध्वनि गुंजायमान होती रही। बड़ी संख्या में शहर एवं आसपास के 25 गांवों के श्रद्धालु यहाँ आकर हनुमत महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का पुण्य लाभ उठा रहे हैं। श्रीराम कथा 29 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक और हनुमत महायज्ञ सुबह 8 से दोपहर 1.30 बजे तक चलेगा। रविवार से यज्ञशाला की परिक्रमा भी प्रारम्भ हो जाएगी।
